किसान बिल निकल सकता है हल

किसान बिल निकल सकता है हल
करीब 2 महीनें होने को है ,और पूरे देश में आज भी किसान बिल विरोध के नाम पर देशव्यापी किसान अंदोलन चल रहा है.केंद्र सरकार और किसान दल नेता के बीच आपसी सहमति नहीं बन पाई. कई बार सरकार और किसान दल के मुखियाँ के आपसी बात चित का दौर चला लेकिन हर बार परिणाम बे नतीजन रहा.
बाद में सुप्रीम कोर्ट बीच में दखल दिया और न्यायपालिका अपनी तरफ से कोर मेंबर की एक समिति का गठन किया जिससे सरकार और किसानों के बीच जो आपसी असहमति है उसको दूर किया जाये जिससे किसानों के हितों का दरकिनार भी न किया जाये और सरकार के नीतियों और किसान बिल कानून को अमली जामा पहनाया जा सके.संसद द्वारा हाल ही में पास तीन कृषि कानूनों को लेकर गतिरोध जारी है। किसान बीते दो महीने से दिल्ली से सटी विभिन्न राज्यों की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार के साथ कई दौर की वार्ता हो चुके है, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कानूनों के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी। साथ ही एक एक कमेटी का भी गठन किया है।सुप्रीम कोर्ट द्वारा कृषि कानूनों पर गठित की गई कमेटी के सदस्य अनिल घनवट ने आज कहा कि हमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि हमें सभी किसान संगठनों (जो कानूनों का समर्थन कर रहे हैं और जो कानूनों का विरोध कर रहे हैं), हितधारकों को सुनना है और रिपोर्ट तैयार करके सुप्रीम कोर्ट को भेजनी है।
संसद द्वारा हाल ही में पास तीन कृषि कानूनों को लेकर गतिरोध जारी है। किसान बीते दो महीने से दिल्ली से सटी विभिन्न राज्यों की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार के साथ कई दौर की वार्ता हो चुके है, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कानूनों के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी। साथ ही एक एक कमेटी का भी गठन किया है।सुप्रीम कोर्ट द्वारा कृषि कानूनों पर गठित की गई कमेटी के सदस्य अनिल घनवट ने आज कहा कि हमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि हमें सभी किसान संगठनों (जो कानूनों का समर्थन कर रहे हैं और जो कानूनों का विरोध कर रहे हैं), हितधारकों को सुनना है और रिपोर्ट तैयार करके सुप्रीम कोर्ट को भेजनी है।
                                         
साथ ही उन्होंने आज की बैठक की जानकारी देते हुए कहा, ‘आज की बैठक में तय हुआ है कि किसानों के साथ पहली बैठक 21 जनवरी को सुबह 11 बजे होगी। जो किसान संगठन बैठक में नहीं आ सकते हैं हम उनका मत वीडियो कांफ्रेंसिंग से जानेंगे।’उन्होंने कहा कि अगर सरकार हमारे साथ आना और बोलना चाहती है, तो हम उसका स्वागत करते हैं। हम सरकार को भी सुनेंगे। सबसे बड़ी चुनौती आंदोलनकारी किसानों को समझाने और हमारे साथ बात करने की है, हम अपने स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेंगे

Akhilesh Namdeo