ललित सुरजन जी की यादों को बनाए रखने के लिए छत्तीसगढ़ के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हो बाल पत्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम

ललित सुरजन जी की तृतीय पुण्यतिथि पर विशेष

देशबंधु पत्र समूह के माध्यम से छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश सहित देश में हिंदी पत्रकारिता की अलख जगाने वाले ललित सुरजन जी की आज तृतीय पुण्यतिथि है। ललित भैया ने अपनी लेखनी के माध्यम से हिंदी पत्रकारिता मेंं जो अवदान दिया उसे भुला पाना नामुमकिन है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित देश के जिन राज्यों में भी जहां देशबंधु पढ़ा जाता है वे देशबंधु की नीति से परिचित है। कहने में संकोच नहीं कि देश की हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में देशबंधु पत्र समूह के संस्थापक एवं संपादक बाबूजी मायाराम सुरजन ने ने जो प्रतिमान स्थापित किए उन प्रतिमानों को बनाए रखने बाबू जी मायाराम सुरजन जी के निधन के बाद ललित भैया ने देशबंधु पत्र समूह के प्रधान संपादक के तौर पर अथक योगदान दिया ‌। जैसा कि देशबंधु की विचारधारा रही उनकी लेखनी निम्न मध्यमवर्ग की आवाज बन कर आजीवन चलती रही। ललित भैया भ्रमणशील होने के साथ अध्ययनशील पत्रकार थे।

वे अध्ययन के लिए लंबी यात्राएं करते , सेमीनार में जाते व्याख्यान देते , समय-समय पर मायाराम सुरजन फाउंडेशन के माध्यम से सेमिनार करते विद्वान जनों को बुलाते उन्हें सुनते तथा भ्रमण के दौरान जन सामान्य से प्राप्त अनुभव और विचारों को अपनी लेखनी में स्थान देते थे। भ्रमणशील पत्रकार होने के कारण ललित भैया से मुलाकातें कम ही होती थी परंतु फोन पर उनसे बाद निरंतर होती थी।

देशबंधु पत्र समूह के प्रधान संपादक के तौर पर उन्होंने पूरे देश में पत्रकारों का एक ऐसी समूह तैयार किया जो जन पक्षधर रहते हुए समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी प्रभावी भूमिका में रहकर सामाजिक परिवर्तन में योगदान दे रहे हैं। मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ सहित देश के अनेक मीडिया संस्थानों विश्वविद्यालयों सरकारी एवं गैर सरकारी क्षेत्रों में ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है जो देशबंधु की विचारधारा से जुड़े रहे हैं।

ललित भैया की पुण्यतिथि पर मैं एक खास विषय पर ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूं जो ललित भैया के देश की पत्रकारिता तथा सामाजिक चेतना एवं परिवर्तन के लिए किए गए प्रयासों में से एक प्रमुख योगदान है। देशबंधु पत्र समूह के प्रधान संपादक के रूप में ललित सुरजन जी ने वर्ष 2007-0 8 में छत्तीसगढ़ में बाल पत्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन किया। मायाराम सुरजन फाउंडेशन एवं यूनिसेफ छत्तीसगढ़ तथा देशबंधु के सहयोग से चलाए गए इस बाल पत्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम लगभग 2012 तक चला जिसमें पूरे छत्तीसगढ़ में 12 से 16 वर्ष की आयु समूह के 6000 से ज्यादा बच्चे शामिल हुए एवं संयुक्त राष्ट्र संघ के बाल अधिकार घोषणा पत्र के अनुसार बच्चों को दिए गए अधिकारों के बारे में जाना तथा बाल पत्रकारिता का प्रशिक्षण लिया। बाल पत्रकारों का यह विशाल समूह बच्चों की समस्याओं पर आधारित समाचार लिखता था जिसे यूनिसेफ की बाल स्वराज पत्रिका प्रकाशित करती थी।यह बाल पत्रकार परियोजना छत्तीसगढ़ के लगभग 100 विकास खंडों में संचालित की गई थी तथा एक विकासखंड में 12 से 14 बच्चों को प्रशिक्षित किया गया था। इनमें से ज्यादातर बच्चे लड़कियां थी जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति थी। बाल पत्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम एक बच्चे के लिए एक वर्ष का होता था जिसमें सप्ताह में एक या दो क्लास लगती थी। बाल पत्रकारिता के लिए चयनित बच्चों को उनके प्रशिक्षक स्थानीय भ्रमण कराते। उनके भ्रमण का क्षेत्र स्कूल, आंगनबाड़ी ,केंद्र अस्पताल, बस स्टैंड एवं अन्य सार्वजनिक स्थल होते थे जहां वे यह देख सकते थे कि यहां बच्चों के क्या अधिकार हैं तथा कहीं इन बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। बाल पत्रकारों को समाज में भी दृष्टि डालने को कहा गया था ताकि वह देख सके कि आसपास के परिवेश में कहीं बाल सुरक्षा एवं बाल अधिकारों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है? अगर कहीं ऐसा हो रहा है तो उस पर बच्चे अपनी समझ के अनुसार समाचार बनाते और वह समाचार यूनिसेफ द्वारा प्रकाशित बाल स्वराज पत्रिका में प्रकाशित होती थी। बाल पत्रकारों द्वारा प्रकाशित इस बाल स्वराज पत्रिका को छत्तीसगढ़ के स्कूलों में भेजने की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन का स्कूल शिक्षा विभाग एवं आदिवासी विकास विभाग सहयोगी बना था तथा इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव एवं आदिवासी विभाग के आयुक्त द्वारा सभी जिले के कलेक्टरों को परिपत्र जारी करके बाल स्वराज पत्रिका के वितरण में सहयोग देने का निर्देश दिया गया था।सौभाग्य से मुझे भी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षक के रूप में शामिल होने का अवसर ललित भैया ने प्रदान किया था।

मैं पेंड्रा विकासखंड में बाल पत्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वयक रहते हुए जो काम किया था जिसे स्वयं ललित भैया ने भी सराहा था। वह मुझे राज्य स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम में आने के लिए कई बार स्वयं भी फोन करते थे। बाल पत्रकार के राज्य स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम मे लगातार जुड़े रहने के दौरान मुझे ललित भैया को सुनने समझने का और ज्यादा अवसर मिला था तथा मुझे उनकी निकटता प्राप्त हुई। ललित भैया बाल पत्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम मैं मेरे कार्य से कारण भी अधिक प्रसन्न थे प्रसन्न रहते थे क्योंकि मैं अपने पेंड्रा विकासखंड स्तर के बाल पत्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम में बच्चों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान अनेक न्यायाधीशों को अपने कार्यक्रम में आमंत्रित करता जिनमें से प्रमुख नाम तत्कालीन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पेंड्रारोड माननीय अनिल गायकवाड, माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट आलोक सिंह जी, माननीय मोहिनी कंवर जी, माननीय प्रबोध टोप्पो जी के नाम उल्लेखनीय है जिन्होंने बाल पत्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम में आकर बच्चों को विधिक जानकारी प्रदान की थी। इन कार्यक्रमों की फोटो मैं मायाराम सुरजन फाउंडेशन भेजता था।इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश में बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशील वातावरण तो तैयार हुआ ही था वही किशोरावस्था उम्र में बाल अधिकारों के प्रति सचेत वह बाल पत्रकार निश्चित रूप से अब युवावस्था में कदम रख चुके है ऐसे में अतिशयोक्ति नहीं है कि ललित सुरजन जी ने बाल पत्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से छत्तीसगढ़ में पहले ही पत्रकारों की एक ऐसी नई पीढ़ी तैयार कर चुके हैं जो आने वाले समय में जिन क्षेत्रों में भी कार्यरत होंगे। वहां रहते हुए वे समाज को मजबूती प्रदान करेंगे।

ललित भैया के इस योगदान को उनकी तृतीय पुण्यतिथि पर याद करते हुए मेरी मांग है कि छत्तीसगढ़ के मिडिल एवं हाई स्कूलों में बाल पत्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम का पाठ्यक्रम अनिवार्य रूप से शामिल कर दिया जाए। बाल पत्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम बाल सुरक्षा एवं बाल संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। ललित भैया की पुण्यतिथि पर यह सच्ची श्रद्धांजलि होगी।💐💐💐💐💐🙏

अक्षय नामदेव पेंड्रा छत्तीसगढ़

(पूर्व प्रशिक्षक बाल पत्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम)
प्राचार्य शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला सकोला पेंड्रा छत्तीसगढ़9406213643

Akhilesh Namdeo

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