सेना के हौसले के आगे झुका चीन
भारत और चीन के बीच विवादों का गहरा नाता है. LAC पर भारत और चीन के बीच गलवान रीज़न में कई महीनों से विवाद है, विवाद की मुख्य वजह गलवान रीज़न में यूरेनियम और थोरियम का बड़ा भंडारण गलवान घाटी के आस पास मौजूद है. जिसका अतिक्रमण चीन करना चाह रहा था. चीन की नापाक हरकतों को मुहतोड़ जबाब भारतीय सेना ने दिया. और सरकार ने चीन की अर्थव्यवस्था में बड़ी सेंधमारी करते हुये चीन के बहुत से एप्लीकेशन को बैन करके चीन को करार तमाचा जड़ा.
अब चीन को उसकी औकात पता चल गई है. न तो देश में मौन सिंह की सरकार है और न ही सेना के हाथ बंधे हैं. ऐसे में अब चीन की हेकड़ी निकल चुकी है. चीन अब बात चित के माध्यम से हल निकालने की फ़िराक में है.
लद्दाख (East Ladakh) में पिछले नौ महीनों से भारत (Indian) और चीन (China) की सेनाओं के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए एक बार फिर दोनों देशों के बीच सैन्य कमांडर स्तर की बैठक होने जा रही है. दोनों देशों के बीच यह नौवें दौर की बैठक है. सूत्रों के मुताबिक बैठक को लेकर रूपरेखा तैयार करने का काम जारी है. सूत्रों के मुताबिक भारत की ओर से इस बार की वार्ता में कुछ बदलाव किया जा सकता है. पिछली कुछ बैठकों की तरह इस बार भी विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि इस बैठक का हिस्सा होंगे.
अभी तक की जानकारी के मुताबिक दोनों देशों के बीच चुशूल सेक्टर के सामने चीन की तरफ मोल्डो में ये बैठक होगी. दोनों पक्षों के बीच आखिरी सैन्य बैठक छह नवंबर को हुई थी. गौरतलब है कि नॉर्दन आर्मी कमांडर के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुडा का कहना है कि भारत और चीन के सेनाओं के बीच बातचीत से नतीजा निकलने की उम्मीद कम है. इस विवाद को राजनियक स्तर पर ही दोनों देश सुलझा सकते हैं. बता दें कि करीब साढ़े तीन महीने पहले भारतीय सैनिक पूर्वी लद्दाख में पेगोंग झील के दक्षिण किनारे पर रणनीतिक रूप से अहम मुखपरी, रेचिन ला और मगर हिल इलाके के कई ऊंचाई वाले स्थानों पर काबिज हो गए थे.

