चंदन के लकड़ी की तस्करी करते दो तस्कर गिरफ्तार,गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की पुलिस को मिली बड़ी सफलता

पिक अप में 12 लाख रुपए की चंदन लकड़ी की तस्करी कर रहे थे आरोपी
अंतरराष्ट्रीय चंदन तस्करों से जुड़े हो सकते हैं तार, पुलिस ड्यूटी है विवेचना में
अखिलेश नामदेव
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने चंदन की लकड़ी की तस्करी में लिफ्ट दो लोगों को 12 लाख रुपए की चंदन की लकड़ी पिकअप में भरकर ले जाते हुए धर दबोचा है। पुलिस को संदेह है कि इन चंदन तक करो के तार अंतर्राष्ट्रीय चंदन तस्करों से जुड़े हो सकते हैं इसलिए गौरेला पेंड्रा मरवाही पुलिस इस मामले की गंभीरता से विवेचना कर रही है। पुलिस में इस मामले में दोनों चंदन तस्करों के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 41 (1) 4 के तहत मामला दर्ज कर आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

इस संबंध में जिला पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना गुप्ता ने बताया कि चंदन तस्करी करते हुए अंतरराज्यीय चंदन तस्कर गिरफ्तार किए गए हैं। आरोपियों के पास से 12 लाख मूल्य की चंदन की लकड़ी एवं तस्करी में प्रयुक्त पिकअप वाहन जप्त किया गया है। तस्करी में लिप्त दो चंदन तस्कर जितेंद्र सिंह और मोतीलाल यादव को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने आगे बताया कि तस्करी के तार जुड़े मध्य प्रदेश से एक तस्कर मध्य प्रदेश का तो दूसरा गौरेला क्षेत्र के गांव का है। उन्होंने बताया कि गौरेला पुलिस में इन दोनों के खिलाफ भादवि की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विवेचना की जा रही है।

इस संबंध में विस्तृत जानकारी इस प्रकार है कि गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला पुलिस को चंदन की तस्करों के बारे में सूचना मिली थी कि मध्य प्रदेश के अनूपपुर से चंदन की लकड़ी काटकर पिकअप वाहन में भर छत्तीसगढ़ के रास्ते तस्करी करने ले जा रहे हैं। सूचना पर गौरेला पुलिस ने लगभग एक क्विंटल वजन की चंदन की लकड़ी के साथ दो तस्करों को पुलिस ने धर दबोचा जिसमें मुख्य तस्कर जितेंद्र सिंह अनूपपुर के जैतहरी का रहने वाला तो मोतीलाल गौरेला थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार तस्करों से जप्त चंदन का बाजार 12 लाख से अधिक है वही जप्त पिकअप वाहन की कीमत 4.50 लाख रुपए आंकी जा रही है। इन दोनों तस्करों के पुलिस के हाथ लगने के बाद अब संभावना व्यक्त की जा रही है कि पुलिस इन दोनों चोरों के सहारे अंतर्राष्ट्रीय चंदन तस्करों तक पहुंचने में सफलता प्राप्त कर लेगी।

बताया जाता है कि दोनों तस्करों को पड़कर पुलिस ने शुरू की जांच में तस्कर गिरोह के सरगना तक भी पहुंचने की कोशिश कर रही है।पुलिस के अनुसार इसके पूर्व 2013 में चंदन तस्करों पर कार्यवाही की गई थी।

चंदन के पेड़ों के लिए अनुकूल है इस इलाके की जलवायु
यहां पर लिखनी है कि छत्तीसगढ़ का मरवाही वन मंडल जो कि एशिया का ग्रीन बेल्ट माना जाता है यहां अमरकंटक की तराई तथा तराई के गांवों एवं किसानों के बाड़ियों में चंदन के पेड़ पाए जाते हैं तथा इन पेड़ों पर चंदन तस्करों की नजर लगी रहती है जो आंख झपकते ही योजना बनाकर इन पेड़ों को काट कर ले जाते हैं तथा उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए भेज देते हैं। चंदन की लकड़ी का बाजार भाव काफी तेज है तथा इसकी काफी डिमांड होती है इसलिए चंदन तस्कर गांव-गांव घूम कर पता करते रहते हैं कि किसकी बड़ी में चंदन के पेड़ है।

पर्यावरण की जानकार बताते हैं कि चंदन के पेड़ों के विकसित होने लिए एक खास तरह की जलवायु की जरूरत होती है यह जलवायु गौरेला पेंड्रा मरवाही अर्थात मरवाही वन मंडल में है जो चंदन के पेड़ों के अनुकूल है। मरवाही वन मंडल की जलवायु चंदन के पेड़ों के अनुकूल होने के कारण ही छत्तीसगढ़ शासन का वन विभाग मरवाही वन मंडल में कुछ निजी किसानों को विशेष आर्थिक पैकेज देकर चंदन के पेड़ तैयार करवा रही है ताकि किसानों को आर्थिक समृद्धि प्राप्त हो परंतु चंदन चोरों के कारण किसानो की हिम्मत नहीं पड़ती कि वे अपने बॉडी एवं खेत में चंदन के पौधे तैयार कराएं।

