ब्रिटिश कालीन विरासत को मिला नया जीवन, जनपद प्राथमिक शाला भर्रापारा (पेंड्रा) फिर से अपने ऐतिहासिक नाम से होगी पहचान, युक्ति युक्तिकरण के बावजूद भी नहीं होगा नाम का परिवर्तन

गौरेला पेंड्रा मरवाही
जनपद प्राथमिक शाला भर्रापारा (पेंड्रा), जो कि ब्रिटिश शासनकाल से संचालित एक ऐतिहासिक विद्यालय है, अब पुनः अपने मूल नाम और पहचान के साथ स्थापित की जा रही है।
विद्यालय परिसर में संचालित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला के साथ एकीकरण एवं समायोजन के बाद यह निर्णय लिया गया है कि यह विद्यालय अपने पुरातन नाम ‘जनपद प्राथमिक शाला भर्रापारा (पेंड्रा)’ से ही जाना जाएगा।

वर्तमान में विद्यालय के दाखिला-खारिज रजिस्टर को देखने पर यह स्पष्ट होता है कि वर्ष 1900 के आसपास विद्यार्थियों का प्रवेश इस विद्यालय में हुआ करता था।
उनके हस्तलिखित दस्तावेज, पृष्ठ और लेखनी आज भी संरक्षित करने योग्य धरोहर हैं।
जिला प्रशासन द्वारा इन दस्तावेजों के संरक्षण व डिजिटलीकरण की दिशा में गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।

कलेक्टर श्रीमती नीला कमलेश मंडावी की पहल
जिला कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मांडवी के नेतृत्व में, जिला प्रशासन द्वारा ऐतिहासिक शिक्षा संस्थानों को संरक्षित करने का सतत प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने विद्यालयों के समायोजन में भी निर्देश दिया कि ऐसे ऐतिहासिक स्कूल अपने मूल नाम और पहचान के साथ ही आगे संचालित हों, ताकि उनकी सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत बनी रहे।

जनपद प्राथमिक शाला भर्रापारा की स्थापना ब्रिटिश काल में हुआ था,
वर्ष 1900 से जुड़े दस्तावेज आज भी संरक्षित है,
युक्तियुक्तिकरण के बावजूद विद्यालय को पुराना नाम बरकरार रखने के पीछे प्रशासन का उद्देश्य जनसामान्य की आस्था को सम्मान करना है,जिला प्रशासन दस्तावेजों के संरक्षण हेतु कर रहा पुख्ता इंतजाम करने प्रयास कर रहा है।

जनपद प्राथमिक शाला भर्रापारा, पेंड्रा को उसकी ऐतिहासिक गरिमा के साथ पुनर्स्थापित किया जाना, एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक और सांस्कृतिक पहल है।यह निर्णय शिक्षा और विरासत संरक्षण करने प्रशासन की मंशा ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने की कोशिश है।

