एक वृक्ष माँ के नाम” अभियान के तहत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में हरा भविष्य संजोने की अनूठी पहल

“माँ के नाम पौधा, धरती के नाम वचन: पर्यावरण बचाने जीपीएम की संकल्पना” :- कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मंडावी

“हरा-भरा छत्तीसगढ़ की ओर एक ठोस कदम — एक वृक्ष माँ के नाम अभियान सफल”
“कलेक्टर मांडवी की पहल रंग लाई, वृक्षारोपण में जनता ने निभाई भागीदारी”
. “हर पंचायत में हरियाली की सौगात, वृक्षारोपण बना जनअभियान”

गौरेला पेंड्रा मरवाही
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने आज एक अद्वितीय उदाहरण पेश किया जब “एक वृक्ष माँ के नाम” अभियान के तहत जिले के सभी 173 ग्राम पंचायतों में एक साथ वृक्षारोपण कर पर्यावरणीय चेतना का सशक्त संदेश दिया गया। इस अभियान को जिला प्रशासन, वन विभाग और जनसामान्य की संयुक्त सहभागिता से एक जनांदोलन का रूप मिला।

-मरवाही विकासखंड के डोंगरिया ग्राम में आयोजित केंद्रीय कार्यक्रम में कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मांडवी की अगुवाई में वृहद वृक्षारोपण किया गया। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों, स्कूली छात्र-छात्राओं एवं ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और अपनी माताओं के नाम पर एक-एक पौधा लगाकर भावनात्मक एवं पर्यावरणीय जुड़ाव को साकार किया।
“मोर गांव, मोर पानी, एक वृक्ष माँ के नाम” जैसे लोक-संवेदनशील नारों के साथ आज डोंगरिया की धरती हरियाली के संकल्प से गूंज उठी। उपस्थित सभी प्रतिभागियों को अपने गांव, जिले और प्रदेश को हरा-भरा रखने की शपथ भी दिलाई गई।

“कलेक्टर मांडवी की पहल रंग लाई, वृक्षारोपण में जनता ने निभाई भागीदारी”
कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मंडावी ने कहा कि :-
“हर पौधा एक उम्मीद है — आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, मिट्टी और जल की गारंटी। यह केवल पर्यावरणीय कार्य नहीं, भावनात्मक जुड़ाव और जिम्मेदारी का प्रतीक है।”

इस आयोजन को लेकर जिलेभर में उत्साह का माहौल रहा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने पूरे जोश से इस अभियान में भाग लिया। यह पहल प्रधानमंत्री के सपने को जमीनी हकीकत में बदलने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।

. “हर पंचायत में हरियाली की सौगात, वृक्षारोपण बना जनअभियान” :- सुरेंद्र प्रसाद वैद्य सी ई ओ जिला पंचायत गौरेला पेंड्रा मरवाही
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ में, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी। एक वृक्ष माँ के नाम लगाकर जब हर नागरिक अपनी ज़मीन से, अपनी प्रकृति से जुड़ता है, तो यही एकजुटता जलवायु संकट के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार बनती है।


