क्या विष्णुदेव सरकार में उद्योग मंत्रालय के अधीनस्थ सीएसआईडीसी हो रहा है कमजोर?
सीएसआईडीसी से छिनते अधिकार, कम होती आय – मुनाफे वाली परियोजनाएं भी छिनने की कगार पर

एस ई सी एल से भी सीएसआईडीसी की भूमिका को खत्म करने की कोशिश?

रायपुर /कोरबा /पेंड्रा


क्या छत्तीसगढ़ सरकार के उद्योग मंत्रालय के अधीनस्थ छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (CSIDC) का अस्तित्व धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है? हाल ही में घटित घटनाएं इस ओर गंभीर संकेत दे रही हैं। विगत दो वर्षों में सीएसआईडीसी न केवल प्रशासनिक नेतृत्व की कमजोरी का शिकार हुआ है, बल्कि मुनाफे वाली कई परियोजनाएं और संपत्तियां भी इससे दूर होती जा रही हैं।

छत्तीसगढ़ रेल कॉरपोरेशन से पूरी हिस्सेदारी गंवाई

ताजा मामला छत्तीसगढ़ रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड का है, जिसमें पहले छत्तीसगढ़ शासन की 51% और भारतीय रेल की 49% हिस्सेदारी थी। परंतु कथित तौर पर कमजोर निर्णय क्षमता और रणनीतिक चूक के चलते अब भारतीय रेल ने इस परियोजना की पूर्ण हिस्सेदारी अपने नाम कर ली है। इसके साथ ही, सीएसआईडीसी के व्यावसायिक परिसर में स्थित इस कंपनी का कार्यालय भी बंद कर दिया गया है, जिससे सीएसआईडीसी की आय में बड़ा घाटा दर्ज किया गया।

एस ई सी एल से भी सीएसआईडीसी की भूमिका को खत्म करने की कोशिश?

छत्तीसगढ़ ईस्ट रेलवे लिमिटेड (सीईआरएल), जो देश के सबसे बड़े कोयला उत्पादन क्षेत्रों जैसे गेवरा-कुशमुंडा और रायगढ़ में रेलवे कॉरिडोर के विकास के लिए स्थापित की गई थी, उसमें भी अब सीएसआईडीसी की स्थिति डगमगाने लगी है।
इसमें सीसीएल की 64%, इरकॉन की 26% और सीएसआईडीसी की मात्र 10% हिस्सेदारी है। यह प्रोजेक्ट भविष्य में अत्यधिक लाभकारी साबित होने वाला है, क्योंकि परियोजना के प्रारंभ होते ही अगले 30 वर्षों तक टोल वसूली होगी, और राजस्व भागीदारी उसी अनुपात में बंटेगी।

लेकिन अब एस ई सी एल प्रबंधन द्वारा गोपनीय रूप से रायपुर चौक स्थित कार्यालय को स्थानांतरित कर अपने सीसीएल कैंपस में ले जाने की योजना बनाई जा रही है। इससे न केवल सीएसआईडीसी को किराए के रूप में होने वाली आय समाप्त होगी, बल्कि इसका संस्थागत दखल भी कम हो जाएगा।

कॉर्पोरेट रणनीति बनाम सरकारी उदासीनता

यह कोई नई रणनीति नहीं है। कॉर्पोरेट कंपनियां पहले राज्य सरकार को परियोजनाओं में हिस्सेदारी देकर वन, पर्यावरण और जमीन संबंधी अड़चनों को पार करती हैं और जब ये बाधाएं समाप्त हो जाती हैं, तो योजना के अनुसार धीरे-धीरे राज्य की हिस्सेदारी को समाप्त करने की ओर कदम बढ़ा देती हैं।
छत्तीसगढ़ रेल कॉरपोरेशन इसका जीवंत उदाहरण है, और अब वही कहानी सीईआरएल के संदर्भ में दोहराई जा रही है।

रायपुर में सीएसआईडीसी परिसरों की हो रही उपेक्षा

रायपुर शहर में सीएसआईडीसी के कई व्यावसायिक परिसर हैं, जो कॉर्पोरेट घरानों और निजी कंपनियों की नजर में हैं, लेकिन फिर भी सीएसआईडीसी के मौजूदा नेतृत्व की निष्क्रियता के चलते यह परिसंपत्तियां खाली होती जा रही हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है।

राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए

गौरतलब है कि वर्तमान उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन स्वयं कोरबा से आते हैं — वही क्षेत्र जहां यह प्रमुख रेल प्रोजेक्ट संचालित हो रहा है। साथ ही सीएसआईडीसी के अध्यक्ष  राजीव कुमार रायपुर के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। ऐसे में उनकी सीधी जिम्मेदारी बनती है कि न केवल इन मुद्दों को गंभीरता से लें, बल्कि रायपुर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में नई कंपनियों को स्थापित कराएं।

एसईसीएल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस को मिल सकता है मुद्दा

जबकि कोरबा में एसईसीएल के खिलाफ महिलाएं अर्धनग्न प्रदर्शन कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर सीएसआईडीसी से संबंधित मामलों में चुप्पी साधे रहना भाजपा सरकार के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह सिद्ध हो सकता है।
यह मुद्दा आने वाले समय में कांग्रेस के लिए बैठे-बैठाए राजनीतिक हथियार भी बन सकता है, जो इसे “मोदी जी के अमृत रेल मिशन” की विफलता के रूप में पेश कर सकती है।

अब सवाल यह है कि क्या मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी रेल विकास कार्यक्रम और राज्यों में संस्थागत सहभागिता की नीति को छत्तीसगढ़ में उचित समर्थन मिल पा रहा है?
या फिर सीएसआईडीसी जैसी संस्थाएं केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगी?

Akhilesh Namdeo

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