हैलीपैड और बंकरों को नष्ट कर पैंगॉन्ग झील से वापस हो रहे चीनी सैनिक
चालबाज़ चीन इस बार अपनी सभी कोशिशों में नाकामयाब रहा. नौ माह लम्बी गंभीर तनातनी के बाद अब वह अपने कदम पैंगॉन्ग झील से पीछे खींचने को मजबूर हो गया है. अब चीन ने फिंगर 4 और फिंगर 5 के मध्य में लगे 80 मीटर लम्बे अपने साइनेज को भी हटा लिया है. इस साइनेज पर मंदारिन भाषा में मानचित्र एवं संकेताक्षर अंकित थे. इस साइनेज को कुछ इस तरह से बनाया गया था, जिससे यह आसमान से भी स्पष्ट तौर पर दिखाई दे सके.
वास्तविक नियंत्रण रेखा (L.A.C) पर चीन और भारत के द्वारा अपने-अपने सैनिकों को पीछे बुलाने की सहमति के बाद लद्दाख स्थित पैंगॉन्ग झील के पास से चीन ने अपने तम्बू उखाड़ने शुरू कर दिए हैं. लद्दाख के पूर्वी भाग में स्थित पैंगॉन्ग त्सो (झील) के दक्षिणी और उत्तरी किनारों से चीन एवं भारतीय सेनाओं की वापसी प्रक्रिया निर्धारित योजना के अनुरूप ही चल रही है. आने वाले एक हफ्ते के अंदर वापसी प्रक्रिया पूर्ण होने की सम्भावना है. दोनों देशों के मध्य हुए करार के अनुसार चीन को पैंगॉन्ग झील के उत्तरी सिरे पर ‘फिंगर आठ’ के पूर्वी क्षेत्रों की ओर सैनिकों को लेकर जाना है. जबकि भारतीय सेना क्षेत्र में ‘फिंगर तीन’ के निकट स्थित धन सिंह थापा पोस्ट तक वापस लौटेगी. इसी प्रकार की कार्यवाही झील के दक्षिणी किनारे पर भी होगी.
जानें फिंगर का मतलब
लद्दाख के क्षेत्र में स्थित पर्वत शिखरों से झील की तरफ आने वाली अंगुलीनुमा रचना को फिंगर के नाम से जाना जाता है. पैंगॉन्ग झील के निकट स्थित फिंगर एरिया 8 भागों में विभाजित है. भारत फिंगर 8 तक अपना अधिकार मानता है. जबकि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने फिंगर 4 से फिंगर 8 के बीच कई इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित कर दिए थे. साथ ही फिंगर 4 से आगे के क्षेत्र में भारतीय जवानों के गश्त पर भी अंकुश लगा दिया था.
हेलीपैड को किया नष्ट एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर भी होंगे ध्वस्त
भारत ने चीन को बात पर सहमत होने के लिए विवश कर दिया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (P.L.A.) ने अप्रैल 2020 के बाद फिंगर 4 से फिंगर 8 के मध्य जो भी निर्माण कार्य किया है, उसे ध्वस्त किया जाएगा. रिपोर्ट्स की मानें तो चीनी सेना ने झील के उत्तरी किनारे वाले क्षेत्र से अस्थायी चौकियां, बंकर, हैलीपैड एवं अन्य ढांचों को हटाने का काम शुरू कर दिया है. चीनी सैनिक भी धीरे-धीरे वापस लौट रहे हैं. साथ ही फिंगर 5 से फिंगर 4 के बीच लगा 80 मीटर लम्बा अपना साइनेज भी चीनी सेना ने हटा लिया है. उस साइनेज पर मंदारिन भाषा में चीनी मानचित्र एवं संकेतक अंकित थे. ये इतनी अच्छी तरह से बनाये गये थे कि आसमान से भी स्पष्ट रूप से दिखाई देते थे.
पैंगॉन्ग झील पर सैटेलाइट एवं ड्रोन से रखी जा रही है निगरानी
दोनों देशों के सैन्य कमांडर आगे की वापसी प्रक्रिया के लिए लगभग रोजाना बैठकों का आयोजन कर रहे हैं, इस प्रक्रिया को नौ माह के भारी गतिरोध एवं उच्चस्तरीय वार्ता के बाद ही पिछले हफ्ते अंतिम रूप दिया गया था. झील के दक्षिणी एवं उत्तरी किनारों पर चल रही वापसी प्रक्रिया को ख़त्म होने में लगभग एक हफ्ते का समय लगेगा. दोनों पक्षों के सैनिकों एवं उपकरणों के वापस होने की प्रक्रिया की लगातार पुष्टि की जा रही है. इसके लिए भौतिक रूप से पुष्टि के साथ सैटेलाइट एवं ड्रोन से खीचीं गयीं तस्वीरों का सहारा लिया जा रहा है.
IN PICS: PLA tanks retreating from the Pangong Lake area in Ladakh as part of the mutual engagement between Indian and Chinese troops. Read full story by @AbhishekBhalla7 – https://t.co/9OokYPgjzU#Ladakh #China #IndianArmy #ITPhotoblog pic.twitter.com/vatapIeufH
— IndiaToday (@IndiaToday) February 16, 2021
नौ माह के लम्बे टकराव के बाद बनी सहमति
दोनों पक्षों की सेनाएं नौ महीने तक चलने वाले भीषण गतिरोध एवं उच्चस्तरीय बैठकों के बाद पैंगॉन्ग झील के उत्तरी एवं दक्षिणी किनारों से वापसी के लिए रजामंद हुई हैं. वापसी प्रक्रिया के तहत दोनों देश की सेनाएं “सत्यापित, समन्वित एवं चरणबद्ध” माध्यमों से ही अग्रिम मोर्चे से हटेंगी. सैन्य वापसी की यह प्रक्रिया 10 फरवरी को प्रारंभ हुई थी. गुरुवार को संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वापसी समझौते पर दिए अपने विस्तृत बयान में कहा था कि पिछले साल चीनी सेना ने फिंगर 8 से फिंगर 4 के बीच अपने कई बंकर एवं अन्य ढांचे स्थापित कर लिए थे.
सेनाओं की वापसी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद होगी बैठक
नौ माह के लम्बे गतिरोध एवं सैन्यवार्ताओं में भारत ने चीन सेना से पैंगॉन्ग झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर 8 से फिंगर 4 के मध्य से हटने के लिए विशेष बल दिया. रक्षा मंत्री श्री सिंह ने संसद में विस्तृत बयान देते हुए कहा था कि झील के क्षेत्र से दोनों देशों की सैन्य वापसी प्रक्रिया खत्म होने के 48 घंटे के अंदर दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों द्वारा एक बैठक का आयोजन करके अन्य मसलों का भी हल निकला जाएगा.

