“मोदी की गारंटी “याद दिलाने छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन का तीन दिवसीय निश्चितकालीन हड़ताल 29 से 31 दिसंबर तक

छत्तीसगढ़ सरकार यदि फेडरेशन से समझौता नहीं की तो स्कूल शिक्षा विभाग में अघोषित रूप से 10 दिन का अवकाश

हड़ताल को सफल बनाने फेडरेशन में सरगर्मी बढ़ी, बैठकों एवं अवकाश आवेदन भरने का सिलसिला तेज





गौरेला पेंड्रा मरवाही

मोदी की गारंटी के तहत केंद्र के समान महंगाई भत्ता एवं लंबित एरियर्स 11 सूत्रीय मांग को लेकर छत्तीसगढ़ के अधिकारी कर्मचारी छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर आगामी 29 दिसंबर से 31 दिसंबर तक निश्चित कालीन हड़ताल पर रहेंगे। इसके लिए छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता युद्ध स्तर पर अवकाश आवेदन भरवाने में जुटे हुए हैं। यदि आंदोलन के पूर्व छत्तीसगढ़ सरकार एवं उनके नुमाइंदे फेडरेशन से बातचीत कर मांग पूरी नहीं करते तो इस बार छत्तीसगढ़ के स्कूलों में पूरे 10 दिन तक पढ़ाई लिखी ठप्प की स्थिति रहेगी!  दरअसल स्कूल शिक्षा विभाग ने छत्तीसगढ़ के स्कूलों में पहले ही 21 दिसंबर से 28 दिसंबर तक शीतकालीन अवकाश घोषित किया हुआ है और अब जब छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन 29 से 30 दिसंबर तक निश्चित कालीन हड़ताल की घोषणा की है तो स्वाभाविक रूप से स्कूलों में पूरे 10 दिन तक अवकाश जैसी स्थिति रहेगी जिसका खामियाजा छात्रों की पढ़ाई पर पड़ना स्वाभाविक है।




छत्तीसगढ़ में इन दिनों कर्मचारियों अधिकारियों में आगामी तीन दिवसीय हड़ताल को लेकर सर गर्मी तेज है तथा कर्मचारी जगत में बैठकों एवं अवकाश आवेदन भरने का सिलसिला तेजी से चल रहा है। दरअसल छत्तीसगढ़ प्रदेश के समस्त कर्मचारी अधिकारी अपनी 11 सूत्रीय मांग को लेकर आगामी 29 दिसंबर से 31 दिसंबर तक तीन दिवसीय निश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे। इस निश्चितकालीन आंदोलन की खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले लगभग सभी विभाग के कर्मचारी संघ सहित छत्तीसगढ़ के लगभग 130 से ज्यादा कर्मचारी संगठन  कलम बंद,काम बंद आंदोलन में सम्मिलित होंगे। इन अधिकारी कर्मचारियों की संख्या प्रदेश में लगभग 5 लाख है। जाहिर है जब इतनी बड़ी संख्या में अधिकारी कर्मचारी हड़ताल पर होंगे तो प्रदेश में पूरी तरह सरकारी कामकाज ठप्प होगा जिससे आम जनमानस बुरी तरह प्रभावित होगा।इसका सीधा असर सरकार की छवि पर पड़ेगा।




फेडरेशन इसलिए कर रहा है हड़ताल


यह सही है कि अधिकारी कर्मचारियों के हड़ताल में जाने से आम जनता को तकलीफ होंगी परंतु इस बात को समझना आवश्यक है कि अधिकारी कर्मचारी हड़ताल पर आखिर क्यों जा रहे हैं? वर्ष 2023 के पहले जब कांग्रेस सत्ता में थी उस समय अधिकारी कर्मचारियों की अनेक तरह की समस्याएं एवं मांगे सरकार के पास लंबित थी। केंद्र के समान महंगाई भत्ता सहित वेतन विसंगति, क्रमोन्नति, पदोन्नति, नियमितीकरण जैसे मुद्दों के अलावा अनेक ऐसी समस्याएं हैं जिनसे कर्मचारियों का हित  प्रभावित हो रहा है जिससे अनेक कर्मचारियों का संवर्ग हड़ताल की राह पर था तब बीजेपी छत्तीसगढ़ की राजनीति में विपक्ष की भूमिका में थे तब चुनाव के पूर्व पूर्वअनेक अवसरों सहित खासकर आंदोलन में पर वे अधिकारी कर्मचारियों के पंडाल की नीचे आते थे तथा अधिकारी कर्मचारियों से अपने लिए समर्थन मांगते थे और कहते थे कि हमारी सरकार आने दीजिए हम आपकी समस्याओं का निराकरण  कर देंगे। कर्मचारियों को लुभाने की इसी राजनीति के तहत छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा ने मोदी की गारंटी का लोक लुभावना वादा किया था जिसके तहत छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों अधिकारियों की सभी लंबित समस्याओं का निराकरण किया है जाने की बात कही गई थी। उनके इस आश्वासन का प्रभाव पड़ा भी और वर्ष 23 के विधानसभा चुनाव  में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की प्रचंड बहुमत वाली सरकार को भाजपा ने पराजित कर दिया था। ऐसा माना जा रहा था कि कांग्रेस की इस करारी हार के पीछे छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों अधिकारियों की भूमिका रही जो लंबे समय से कांग्रेस की भूपेश सरकार से नाराज थे। मोदी की गारंटी का वादा करके छत्तीसगढ़ में भाजपा की तो सरकार बन गई परंतु कर्मचारियों अधिकारियों से संबंधित मामले लंबित ही रहे। इन लंबित मांगों को पूरा करने तथा मोदी की गारंटी लागू करने के लिए छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर पूरे प्रदेश में एक दिन का धरना प्रदर्शन एवं सामूहिक अवकाश आंदोलन करके सरकार को जगाने की कोशिश की गई थी परंतु इसके बावजूद भी कर्मचारियों की मांगे लंबित रही जिसके परिणाम स्वरूप छत्तीसगढ़ के कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर तीन दिवसीय निश्चितकालीन आंदोलन किया जा रहा है जिसके लिए छत्तीसगढ़ के अलग-अलग प्रदेशों में तैयारी की जा रही है। प्रदेश संभाग एवं जिला स्तर के कर्मचारी नेता सभी तहसील एवं विकासखंड में युद्ध स्तर पर अवकाश आवेदन भरने में जुटे हैं। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की जो 11 सूत्रीय मांगे हैं उसमें मोदी की गारंटी के तहत शासकीय सेवकों को केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता,जुलाई 2019 से लंबित महंगाई भत्ता एवं एरियर राशि को जीपीएफ खाते में समायोजित करने, लिपिकों को सहित विभिन्न संवर्ग के वेतन विसंगति दूर करने, अर्जित अवकाश नगदी कारण 300 दिवस करने, चार स्तरीय समय महान वेतनमान लागू करने कैशलेस सुविधा तथा प्रथम नियुक्ति से सेवा गणना कर संपूर्ण लाभ देने सहित 11 सूत्री मांगों के समर्थन में अवकाश आवेदन भराया जा रहा है।





गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में फेडरेशन की गतिविधियां तेज बन रही है आंदोलन की रणनीति



छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की 11 सूत्रीय मांग को लेकर आयोजित तीन दिवसीय आंदोलन को लेकर जिले में फेडरेशन की गतिविधियां तेज हो गई है तथा अलग-अलग विभागों में संपर्क करके फेडरेशन  एवं अनुसांगिक संगठनों के नेता युद्ध स्तर पर अवकाश आवेदन भराने में जुटे हुए हैं। इसी रणनीति पर विचार विमर्श करने के लिए बीते 20 सितंबर को राठौर भवन में फेडरेशन से जुड़े सभी संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित हुए तथा तीन दिवसीय निश्चित कालीन आंदोलन को सफल बनाने रणनीति पर विचार विमर्श किया। बैठक में मुख्य रूप से डा संजय शर्मा,आकाश राय, मोनिका जैन,दिनेश राठौर, रामकुमार बघेल, अरुण कछवाहा,सूरज चौहान, सतीश श्रीवास, प्रीतम कोसले, प्यारे लाल पुरी, मुकेश निषाद, राजकुमार टंडन,
अरविंद उर्मलिया, सत्यनारायण जायसवाल, राजेश यादव, रैदास,ओमप्रकाश सोनवानी, कैलाश लदेर,  राजेश चौधरी,राकेश चौधरी,सौरभ जायसवाल, अमरीक सिंह, प्रकाश रैदास,अजय कुमार चौधरी प्रीतम कोशले, पीयूष गुप्ता, सुंदर पैकरा, सुशील तिवारी,संजय कुमार सोनी, बाबूलाल पांडे,अजय कुमार सप्रे, सौरभ जयसवाल, अक्षय नामदेव सहित विभिन्न संगठनों के जिला अध्यक्ष एवं पदाधिकारी एवं नेता शामिलथे।

Akhilesh Namdeo

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