श्री सिद्ध बाबा आश्रम बेलगहना में सद्गुरु देव की 15 वीं महा समाधि दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई,सद्गुरु स्वामी सदानंद परमहंस महाराज की महा समाधि दिवस पर उमड़ा आस्था का सैलाब
महा समाधि दिवस पर भव्य आयोजन, 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

बेलगहना (बिलासपुर)
श्री सिद्ध बाबा अद्वैत परमहंस आश्रम बेलगहना में ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 श्री स्वामी सदानंद परमहंस महाराज जी की 15 वीं महा समाधि दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और वैदिक विधि-विधान के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर देश-प्रदेश से हजारों श्रद्धालु भक्त आश्रम परिसर में एकत्रित हुए।
महा समाधि दिवस के अवसर पर श्री श्री 108 श्री शिवानंद महाराज जी के सानिध्य में परम्परानुसार सद्गुरु चरण पादुका एवं समाधि पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पमाला, धूप-दीप, वस्त्र एवं श्रीफल अर्पित कर गुरु-शिष्य परंपरा को अक्षुण्ण रखा गया।
इस शुभ अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालु भक्तों ने अपनी-अपनी सांस्कृतिक एवं लोक कलाओं की प्रस्तुति देकर सद्गुरु देव के प्रति श्रद्धा अर्पित की। सोनसाय नवागांव के भक्तों द्वारा गौरा-गौरी की झांकी, वहीं गणेशपुरी करिआम के भक्तों द्वारा डंडा नृत्य की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
श्री सिद्ध बाबा आश्रम बेलगहना से जुड़े पूज्य स्वामी सदानंद परमहंस महाराज जी ऐसे महान संत रहे, जिन्होंने अविभाजित बिलासपुर जिले के आदिवासी अंचल, विशेषकर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, केंदा, रतनपुर एवं बेलगहना क्षेत्र में सनातन धर्म की अलख जगाई। उन्होंने अपने तप-साधना से भगवान पारदेश्वर शिवलिंग का निर्माण किया, जो सम्पूर्ण भारत में अद्वितीय है और जिसके दर्शन के लिए वर्ष भर देशभर से श्रद्धालु आते रहते हैं।
स्वामी सदानंद महाराज जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन आदिवासी समाज को एक सूत्र में पिरोने और उन्हें सनातन धर्म से जोड़ने में समर्पित कर दिया। उनके प्रभाव और आध्यात्मिक तेज से उनके शिष्यों की संख्या हजारों में रही, जिसमें आदिवासी समाज के साथ-साथ सभी वर्गों के लोग शामिल थे।
वर्तमान में श्री 108 श्री शिवानंद महाराज जी के पावन सानिध्य एवं मार्गदर्शन में 33 आश्रमों का संचालन तथा अनेक धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन निरंतर किया जा रहा है, जो अत्यंत सराहनीय है।

इस आयोजन में जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों से भी श्रद्धालु भक्त शामिल हुए। आश्रमिक भक्तों द्वारा अतिथियों के ठहराव हेतु भक्त निवास (कमरा निर्माण) की इच्छा व्यक्त की गई, जिसे पूज्य स्वामी जी ने सहर्ष स्वीकार करते हुए उसका नाम भक्त निवास रखा और अपने कर-कमलों से भूमि पूजन किया।
महा समाधि दिवस के अवसर पर सेवा समिति द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें 15 हजार से अधिक श्रद्धालु भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन पूर्णतः अनुशासित, भव्य एवं श्रद्धामय वातावरण में संपन्न हुआ।

