राजनीति बिना राजनेता के कोरी कल्पना मात्र होगीं, बिना राजनेता के राजनीति की कल्पना नहीं
किसी भी राष्ट्र के राष्ट्र प्रमुख का उद्देश्य देश की आंतरिक मजबूती के साथ-साथ बाहरी
बदलते वक्त के अनुसार राजनीतिक पार्टियों की नीतियों में भी फेरबदल होता रहता है. जब
लोकतंत्र के नींव की आधारशिला समानता से है. समानता का तात्पर्य सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक हर
आज 21वीं सदी में यदि आपको दुश्मन राष्ट्र के ऊपर हावी होना है, तो आपकी
कृषि कानून को लेकर सरकार और किसानों के बीच जारी गतिरोध का कोई भी हल
म्यांमार में सत्ता को लेकर चल रहा विवाद अभी शांत नहीं हुआ कि सत्ता खोने
दुश्मनों को मुँहतोड़ जवाब देने का एक ही तरीका है कि अपनी मारकक्षमता को बढ़ाते
कहते हैं जीवन में बुढ़ापा एक ऐसा कड़वा सच है, जिससे सभी को गुजरना पड़ता
अन्य दिनों जैसे ही रविवार का दिन भी बिल्कुल शांत था. सर्द की ठंड में
