किसान आंदोलन के नाम पर हिंसा का खेल खेलना देश की गरिमा और मर्यादा को
कोरोना महामारी का दंश भले भारत में अब भयावह न रहा हो, लेकिन दुनिया के
कहा जाता है, राजनीति किसी की सगी नहीं होतीं हैं, राजनीतिक अखाड़ा हर पल दाव-पेंच
बम धमाकों से दिल्ली को दहलाने की नाकाम कोशिश होती रहती है, अराजक तत्त्वों को
कहते हैं, किसी देश के विकास को नापने का सबसे सरल जरिया है ये जानना
कृषि कानूनों के खिलाफ सरकार और किसानों के बीच जारी गतिरोध समाप्त होने का नाम
26 जनवरी को दिल्ली में जो कुछ हुआ, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक है, परंतु
अमूमन पड़ोसी देश नेपाल में अगर आप 100 भारतीय रुपया लेकर जाते हैं, तो 160
किसान आंदोलन बीते 26 तारीख के उपद्रव के बाद लग रहा था कि ठंडे बस्ते
