मरवाही विधानसभा में टिकट के इच्छुक दो दर्जन से ज्यादा कांग्रेसी आदिवासी नेताओं सहित 200 कार्यकर्ताओं ने दिया कांग्रेस से इस्तीफा

अखिलेश नामदेव/ छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव डेक्स 2023

मरवाही (24)

मरवाही के कांग्रेस विधायक डॉक्टर के के ध्रुव को विधानसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने से नाराज लगभग दो दर्जन आदिवासी कांग्रेसी नेताओं सहित 200 कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं नेता ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। इस घटनाक्रम के बाद मरवाही की राजनीति में एक बार फिर उलट फेर के आसार दिखाई दे रहे हैं।

मरवाही में कांग्रेस का चुनाव प्रचार अभियान जोर पकड़ने के पहले ही डगमगाया

डॉ के के ध्रुव का चुनाव प्रचार अभियान

दरअसल मरवाही विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2019 में हुए विधानसभा उपचुनाव में मरवाही में 20 वर्ष से ज्यादा समय तक बीएमओ के पद पर पदस्थ रहे डॉक्टर के के ध्रुव को मरवाही की टिकट दी गई थी। उस समय हुए विधानसभा उपचुनाव में तमाम विरोधाभास के बावजूद यहां के आदिवासी कांग्रेसी नेताओं ने अपने टिकट पाने की महत्वाकांक्षाओं को दबाते हुए कांग्रेस के पक्ष में काम किया था क्योंकि स्वयं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस विधानसभा उपचुनाव की मॉनीटरिंग कर रहे थे जिसके कारण डॉक्टर के के ध्रुव को कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में रिकार्ड मतों से जीत मिली थी परंतु वर्ष 2023 के विधानसभा के आम चुनाव में मरवाही कांग्रेस के पुराने टिकटार्थी लगातार 6 महीने से डॉक्टर के के ध्रुव को बाहरी बताते हुए अब उन्हें कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में स्वीकार नहीं कर रहे हैं तथा अब स्थानीय कांग्रेसी आदिवासी नेता को टिकट देने की मांग कर रहे हैं। मरवाही कांग्रेस में लगभग 28 आदिवासी कांग्रेसी नेताओं ने कांग्रेस की टिकट के लिए दावेदारी की थी परंतु डॉक्टर के के ध्रुव के सहज सरल स्वभाव को देखने के साथ उनके मरवाही उपचुनाव में रिकार्ड मतों से जीत दर्ज करने के कारण कांग्रेस ने उन पर भरोसा जताया तथा टिकटार्थियों के विरोध को दरकिनार करते हुए एक बार फिर डॉक्टर के के ध्रुव को कांग्रेस प्रत्याशी बना दिया है इसके बाद से टिकट की प्रत्याशा में लंबे समय से कांग्रेस का काम कर रहे आदिवासी कांग्रेसी नेताओं ने लामबंदी शुरू कर सीधे-सीधे कांग्रेस प्रत्याशी डॉक्टर के के ध्रुव का विरोध शुरू कर दिया परंतु इस विरोध का भी कोई असर पार्टी हाई कमान पर नहीं दिखाई देने के कारण दो दर्जन से ज्यादा आदिवासी कांग्रेसी नेता जो मरवाही कांग्रेस से टिकट चाहते थे सहित लगभग 200 कांग्रेसी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने अपने पद से एवं पार्टी से इस्तीफा दे दिया है तब उन्होंने अपनी इस्तीफा जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री पुष्पराज सिंह को देने के साथ निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा की है। मरवाही के कांग्रेस प्रत्याशी डॉ कक ध्रुव का जो नेता विरोध कर रहे हैं तथा कांग्रेस से इस्तीफा दिया है ।

प्रमुख रूप से गुलाब सिंह राज, जनपद अध्यक्ष प्रताप सिंह मरावी मरवाही, जनपद अध्यक्ष पेंड्रा आशा बबलू मरावी, सरपंच संघ मरवाही के अध्यक्ष गजरूप सिंह सलाम, पूर्व जिला पंचायत सदस्य शंकर कंवर, नारायण सिंह अर्मों, आदिवासी नेता प्रमोद सिंह परस्ते, सर्व आदिवासी समाज गौरेला पेंड्रा मरवाही के जिला अध्यक्ष दया सिंह धाकरे, चैन सिंह सरौता अजय शुक्ला बलदेव वाकरे, दीनदयाल मार्को तथा जिला पंचायत गौरेला पेंड्रा मरवाही के उपाध्यक्ष अजीत सिंह श्याम सहित लगभग 200 आदिवासी कांग्रेसी नेता एवं कार्यकर्ता शामिल है जो जोन एवं बूथ प्रभारी है। अब इतनी बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता एवं नेता चुनाव के समय कांग्रेस छोड़ रहे हैं तो आने वाले समय में मरवाही में कांग्रेस का चुनाव प्रचार अभियान कैसा होगा इसका अंदाजा लगा पाना कठिन नहीं है।

जीजा और साले में से कोई एक हो सकता है निर्दलीय प्रत्याशी

गुलाब राज
गजरूप सलाम

मरवाही कांग्रेस से बड़ी तादाद में आदिवासी कांग्रेसी नेताओं एवं कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की इस्तीफा के बाद इनके बीच जो सर्व सम्मति से निर्दलीय प्रत्याशी उतारे जाने की सहमति बन रही है उसके अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी से वर्ष 2018 में चुनाव लड़ने वाले गुलाब राज निर्दलीय प्रत्याशी हो सकते हैं वही गुलाब राज खुद कह रहे हैं कि सर्वसम्मति रही तो मैं निर्दलीय प्रत्याशी रहूंगा और यदि जरूरत पड़ी तो मेरे साले गजरूप सिंह सलाम निर्दलीय प्रत्याशी होंगे। अब जीजा और साले में निर्दलीय प्रत्याशी कौन होगा यह तो नामांकन भरने के दिन ही समझ में आएगा।

मरवाही की राजनीति में दल बदल कोई बड़ी बात नहीं

पर एक सच यह भी कि कांग्रेस कभी ब्लैकमेल नहीं होती

स्व.डॉक्टर भंवर सिंह पोर्ते

आजादी के बाद से लेकर अब तक मरवाही हमेशा से राजनीतिक उलट फेर के लिए देश एवं प्रदेश में चर्चित रहा है। कभी डॉक्टर भंवर सिंह पोर्ते मरवाही क्षेत्र के विधायक रहते हुए कांग्रेस के आदिवासी नेता के रूप में प्रदेश एवं देश में अपनी पहचान बनाई थी। बाद में वर्ष 1985 में जब तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने उनकी टिकट काट दी थी तब वे वर्ष 1990 के विधानसभा चुनाव में भाजपा में शामिल होकर मरवाही से विधायक चुने गए और अभिभाजित मध्यप्रदेश में सुंदरलाल पटवा की सरकार में पशुधन एवं डेयरी विकास मंत्री बने। बाद में जब 1993 में सुंदरलाल पटवा की सरकार भंग कर दी गई थी तब दोबारा आम चुनाव होने पर भाजपा ने भंवर सिंह पोर्ते को भाजपा की टिकट से वंचित कर दिया था। तब डॉक्टर भंवर सिंह पोर्ते ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नागर छाप से चुनाव लड़ना पसंद किया था परंतु इसी दौरान 16 नवंबर 1993 को डॉक्टर भंवर सिंह पोर्ते का निधन हो गया था ।उस विधानसभा चुनाव में मरवाही से कांग्रेस की टिकट पहलवान सिंह मरावी को मिली जो एक बार कांग्रेस के विधायक बने और दूसरी बार कांग्रेस की वर्ष 1998 में टिकट मिलने पर भाजपा के रामदयाल उइके से पराजित हो गए थे।

राम दयाल उइके


वर्ष 2000 में जब मध्य प्रदेश से अलग होकर नया छत्तीसगढ़ राज्य बना तब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री अजीत जोगी बनाए गए जो विधायक नहीं थे तब उनके लिए मरवाही के भाजपा विधायक रामदयाल उईके ने फरवरी 2001 में हुए विधानसभा उपचुनाव में अपनी सीट खाली करके मरवाही को देश की राजनीतिक में चर्चा का केंद्र बना दिया था। रामदयाल उइके पटवारी की नौकरी छोड़कर राजनीति में शामिल हुए थे। वे नफा नुकसान को अच्छी तरह से समझते थे मरवाही सीट खाली करते हुए उन्होंने कहा था कि मैं मरवाही के विकास के लिए अपनी सीट छोड़ रहा हूं। वर्ष 2001 के विधानसभा उपचुनाव में स्वर्गीय डॉक्टर भंवर सिंह पोर्ते की पत्नी श्रीमती हेमंत पोर्ते जो उसेश समय छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष थी ने विद्या चरण शुक्ल की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ी थी। यह वह दौर था जब न सिर्फ मरवाही में बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में दल बदल की आंधी देखने को मिली थी। अजीत जोगी 3 साल तक ही मुख्यमंत्री रहे और वर्ष 2003 में जब छत्तीसगढ़ में विधानसभा के आम चुनाव हुए तब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को पराजय का सामना करना पड़ा था और भाजपा की सरकार छत्तीसगढ़ में बनी थी। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद पूर्व विधायक पहलवान सिंह मरावी जैसे ना जाने कितने लोगों ने दल बदल किया था। हालांकि इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी मरवाही से लगातार विधायक रहे और मरवाही सहित छत्तीसगढ़ की राजनीति में सक्रिय रहे। वर्ष 2013 में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने मरवाही सीट अपने बेटे अमित जोगी के हवाले कर दी थी जो वर्ष 2013 में मरवाही से रिकार्ड मतों से कांग्रेस के विधायक बने।

समीरा पैकरा

इस विधानसभा चुनाव में अमित जोगी ने भाजपा की समीरा पैकरा को चुनाव में हराया था वहीं वर्ष 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने अपनी नई क्षेत्रीय पार्टी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस योगी का गठन कर लिया था।

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में मरवाही से अजीत जोगी अपनी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जोगी पार्टी से चुनाव लड़कर मरवाही से विधायक बने थे वही इस विधानसभा चुनाव में भाजपा से डॉक्टर भंवर सिंह पोर्ते की पुत्री अर्चना पोर्ते कांग्रेस से गोंड़ समाज के जिला अध्यक्ष पूर्व सरपंच हर्राटोला कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में थे। इस विधानसभा उपचुनाव में अजीत जोगी एक तरफ मतों के साथ विधायक बने थे। कालांतर में जब वर्ष 2019 में मरवाही विधायक रहते हुए अजीत जोगी का निधन हुआ तब हुए विधानसभा उपचुनाव में अर्चना पोर्ते सहित अनेक भाजपा के नेता कांग्रेस में शामिल हो गए थे छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के भी अनेक नेताओं ने उसे समय कांग्रेस का दामन थाम लिया था।

अर्चना पोर्ते

इसी उपचुनाव मैं अर्चना पोर्ते के बाद ही अर्चना पोर्ते भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गई थी और इनाम स्वरूप उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग का सदस्य बनाया गया था। इस तरह मरवाही का राजनीतिक रिकॉर्ड खंगाले तो यहां दल बदल कोई बड़ी बात नहीं है चुनाव सामने हैं तो दल बदल होना ही है।

कांग्रेस कभी ब्लैकमेल नहीं होती

कांग्रेस की राजनीति में लगभग चार दशक गुजरने वाले एक कांग्रेसी नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त में सिर्फ इतना ही कहा कि यह जो दल बदल विधानसभा चुनाव में दिख रहा है उसे कांग्रेस को फर्क नहीं पड़ने वाला है।कांग्रेस पार्टी में अभी तक अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं परंतु यह एक ऐसी पार्टी है जो कभी ब्लैकमेल नहीं होती। जब-जब विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव होते हैं तो स्वाभाविक रूप से टिकट नहीं मिलने वाले असंतुष्ट नेता दल बदल करते हैं तथा संगठन पर दबाव बनाने ब्लैकमेल करते हैं परंतु कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है जो ब्लैकमेल नहीं होती इसमें निष्ठावान कार्यकर्ताओं का खून पसीना शामिल है।

Akhilesh Namdeo

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