इटावा में कथावाचकों के साथ अमानवीय व्यवहार पर उबाल, यादव समाज ने राष्ट्रपति से की न्याय की मांग



गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (छत्तीसगढ़)


उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद में यादव समाज के दो प्रमुख कथावाचकों – मुकुटमणि यादव और संत सिंह यादव – के साथ कथित ब्राह्मण समाज के लोगों द्वारा की गई अमर्यादित, अमानवीय एवं निंदनीय घटना को लेकर छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में यादव समाज उबल पड़ा है। इस प्रकरण को लेकर समाज ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिलाधीश को सौंपा और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की।



यादव समाज के जिला अध्यक्ष दुर्गेश यादव एवं अन्य पदाधिकारियों ने ज्ञापन में बताया कि कथावाचकों के साथ व्यास पीठ से नीचे उतारकर मारपीट की गई, उन्हें जबरन ब्राह्मणी मूत्र से “पवित्र” करने का घिनौना प्रयास किया गया, साथ ही उनकी अंगूठी व चेन छीन ली गई और घर से माफी मंगवाने का दबाव डाला गया। यह पूरी घटना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि सामाजिक समरसता के ताने-बाने को तोड़ने वाली है।



ज्ञापन में इस बात पर भी नाराजगी जताई गई कि कथित ब्राह्मण समाज के लोग अपने वर्चस्व को बनाए रखने के लिए बार-बार ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। महासमुंद की कथावाचिका यामिनी साहू और मध्यप्रदेश की दविका पटेल को भी कथावाचन से रोकने और अपमानित करने की घटनाएं इसी मानसिकता का प्रमाण हैं।

यादव समाज के नेताओं ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के वंशज होकर यदि उन्हें अपने आराध्य की कथा कहने का भी अधिकार न दिया जाए, तो यह केवल कथा वाचकों का ही नहीं, बल्कि पूरी यादव जाति का अपमान है। ऐसे असामाजिक, धर्म के नाम पर हिंसा करने वाले लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई किसी के धर्म, गरिमा और सम्मान को ठेस पहुँचाने का साहस न कर सके।



ज्ञापन देने वालों में दुर्गेश यादव (जिलाध्यक्ष), दिलीप यादव (प्रदेश उपाध्यक्ष), कमलेश यादव (जिला सचिव), राधेश्याम यादव (कार्यकारी जिलाध्यक्ष), केशव यादव (ब्लाक अध्यक्ष पेण्ड्रा), मुरारी यादव (गौरेला), किरन यादव (महिला जिलाध्यक्ष) सहित अनेक पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

यादव समाज ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक समुदाय विशेष का नहीं, बल्कि संविधान, सामाजिक न्याय और धार्मिक स्वतंत्रता का भी गंभीर उल्लंघन है। समाज ने राष्ट्रपति से निवेदन किया है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

Akhilesh Namdeo

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