नाबालिक लड़कियों के साथ दरिंदगी एक की मौत प्यारे मियाँ सलाखों के पीछे

नाबालिक लड़कियों के साथ दरिंदगी एक की मौत प्यारे मियाँ सलाखों के पीछे

बलात्कार जैसी घटना क्रूरता और हैवानियत को बयां करती है. देश में बहुत से हाईप्रोफाइल रेप के मामले सामने आते हैं. ताजा मामला मध्यप्रदेश का है, आरोपी प्यारे मियाँ एक स्थानीय अख़बार के मालिक हैं. मामला पिछले साल जुलाई का है, अब इस केस में नया मोड़ सामने आया है.

इस मामले में शहर के सरकारी बालिका गृह में रह रही यौन शोषण कांड की 17 वर्षीय एक पीड़िता ने अधिक मात्रा में नींद की गोलियाँ खा लीं, जिस वजह से उनकी मृत्यु हो गई.

बुधवार की रात को पीड़िता को गंभीर स्थिति में हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था. भोपाल जिला प्रशासन ने इस मामले में न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले साल जुलाई में स्थानीय अखबार चलाने वाले आरोपित प्यारे मियाँ (68) के खिलाफ पाँच नाबालिग लड़कियों के साथ कई बार बलात्कार करने का मामला दर्ज किया गया था. वहीं जिस लड़की ने नींद की गोलियाँ लीं, वह भी इन पीड़ितों में से एक थी.

गौरतलब है कि यह मामला पिछले साल तब सामने आया था, जब देर रात गश्त करती पुलिस पार्टी को 5 लड़कियाँ सड़क पर दिखी थीं. कारण पूछा गया था, तो जवाब देने के हालत में एक भी लड़की नहीं थी. सब शराब के नशे में थीं.

नाबालिग लड़कियों का शराब के नशे में होना पुलिस को खटका था. पुलिस ने सभी 5 लड़कियों को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया था. फिर इनकी काउंसलिंग की गई थी. जब पूछताछ हुई तो इन्होंने अपने साथ हुए यौन शोषण का खुलासा किया था.

प्यारे मियाँ अपनी सहायक स्वीटी विश्वकर्मा की मदद से इन लड़कियों को अपने यहाँ नाचने के लिए बुलाता था. विष्णु हाइट्स स्थित फ्लैट में पार्टी के दौरान प्यारे मियाँ द्वारा एक नाबालिग का यौन शोषण करने की बात भी सामने आई थी.

इन पाँचों लड़कियों ने भी प्यारे मियाँ पर लैंगिक शोषण का आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्हें समय-समय पर उस फ्लैट में ले जाया जाता था. उन्हें इसके लिए धनराशि भी दी जाती थी. बता दें कि इस मामले के सभी आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं.

भोपाल आईजी उपेंद्र जैन ने मामले की जानकारी देते हुए बुधवार को बताया था कि पीड़ित लड़की का सरकारी हमीदिया अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी हालत बेहद नाजुक है.

पुलिस अधिकारी ने बताया था कि घटना के बाद जिलाधिकारी ने मामले की न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं. उन्होंने बताया कि जाँच रिपोर्ट के बाद ही घटना के पीछे की असल कहानी का पता चलेगा.

सरकारी अस्पताल में ज्यादा मात्रा में नींद की गोलियों का सेवन करने वाली दुष्कर्म पीड़िता को वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन स्थिति नाजुक ही बनी रही और उनकी मौत हो गई. पुलिस पूरे मामले में यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिर कैसे आश्रय गृह में पीड़िता को नींद की गोलियाँ मिलीं.

Akhilesh Namdeo