गौरेला बीईओ की मनमानी के कारण संकुल केंद्र ललाती में संकुल समन्वयक का पद 3 माह से रिक्त

संकुल प्राचार्य ललाती के प्रस्ताव को बी ई ओ ने दरकिनार कर सधवानी संकुल के समन्वयक को दिया अतिरिक्त प्रभार
सधवानी के संकुल समन्वयक ने अतिरिक्त प्रभार लेने से किया इनकार
बीईओ के मनमानी की कलेक्टर सहित शिक्षा विभाग के अधिकारियों को हुई शिकायत
अखिलेश नामदेव
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड में बीईओ मनमानी पर उतर आए हैं। गौरेला विकासखंड के संकुल केंद्र ललाती में संकुल समन्वयक का पद 3 महीने पहले पदोन्नति से रिक्त होने के कारण संकुल प्राचार्य ललाती ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी को संकुल अंतर्गत के शिक्षक का नाम प्रस्तावित किया था परंतु उस नाम बीईओ को परहेज होने के कारण उन्होंने संकुल प्राचार्य के प्रस्ताव को दरकिनार कर दूसरे संकुल सधवानी के समन्वयक को ललाती संकुल का अतिरिक्त प्रभार लेने को आदेशित कर दिया परंतु सधवानी संकुल के समन्वयक शिव कुमार मिश्रा ने असमर्थतावश अतिरिक्त प्रभार नहीं लिया जिसके कारण बीते 3 महीने से संकुल ललाती का कामकाज भगवान भरोसे चल रहा है। इस पूरे मामले में विकास खंड शिक्षा अधिकारी संजीव शुक्ला की मनमानी की शिकायत कलेक्टर गौरेला पेंड्रा मरवाही श्रीमती लीना कमलेश मंडावी सहित शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को की गई है।


इस संबंध में शिकायतकर्ता शिक्षक रामचंद्र राठौर शिक्षक शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला धनगंवा द्वारा कलेक्टर को की गई शिकायत में बताया गया है कि बीते 2 जनवरी 2024 को संकुल समन्वयक ललाती राजकुमार पटेल की पदोन्नति होने पश्चात वहां का पद रिक्त हो गया है जो आज पर्यंत 2 अप्रैल तक रिक्त पड़ा हुआ है। उक्त समन्वयक के रिक्त पद को भरने के लिए संकुल प्राचार्य ललाती द्वारा 10 जनवरी 2024 को गौरेला विकासखंड के विकासखंड शिक्षा अधिकारी को एक प्रस्ताव भेजा गया था जिसमें रामचंद्र राठौर शिक्षक पूर्व माध्यमिक शाला धनगवां का नाम संकुल समन्वय हेतु प्रस्तावित किया गया था परंतु विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा संकुल प्राचार्य द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को दरकिनार करके रखा गया तथा ढाई महीने तक समन्वयक का पद रिक्त रखने के बाद दूसरे संकुल के समन्वयक शिव प्रसाद मिश्र को संकुल केंद्र ललाती के समन्वयक के अतिरिक्त प्रभार का आदेश जारी कर दिया गया परंतु असमर्थतावश शिव कुमार मिश्र ने भी अतिरिक्त प्रभार नहीं लिया जिसके करण संकुल केंद्र ललाती के समन्वयक का पद बीते 3 महीने से खाली है तथा वहां का कामकाज भगवान भरोसे चल रहा है।

समग्र शिक्षा रायपुर के दिशा निर्देशों का हुआ उल्लंघन
संकुल प्राचार्य ललाती ने समग्र शिक्षा रायपुर द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करते हुए करते हुए संकुल क्षेत्र में पदस्थ शिक्षक रामचंद्र राठौर का प्रस्ताव समन्वय हेतु भेजा था परंतु संबंधित शिक्षक रामचंद्र राठौर से विकासखंड शिक्षा अधिकारी गौरेला किसी कारण से दुर्भावना रखते हुए उक्त प्रस्तावित नाम को दरकिनार रखते हुए शिवकुमार मिश्र समन्वय को अतिरिक्त प्रभार देने आदेशित कर दिया जबकि समग्र शिक्षा द्वारा जारी दिशा निर्देशों में संकुल समन्वयक उसी संकुल केंद्र का होना चाहिए। उल्लेखनीय की शिक्षक रामचंद्र राठौर द्वारा विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय गौरेला की कुछ अनियमितताओं की शिकायत पूर्व में कलेक्टर गौरेला पेंड्रा मरवाही सहित शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पहले की थी इसलिए रामचंद्र राठौर से दुर्भावना रखते हुए संकुल प्राचार्य के प्रस्ताव को दरकिनार किया गया। अब पुनः इस मामले की शिकायत कलेक्टर को की गई है।
शिकायतकर्ता शिक्षक नेताओं को बदले की भावना से प्रताड़ित कर दबाव बनाते हैं बीईओ संजीव शुक्ला
उल्लेखनीय है कि जहां एक और गौरेला विकासखंड में शिक्षा अधिकारी कार्यालय की अनियमित चरम पर है जिसकी शिकायतें सहायक शिक्षक फेडरेशन द्वारा कई बार की जाती रही। शिकायतों के बाद शिक्षा अधिकारी की अनियमिताओं में लगाम भी लगा परंतु अपने खिलाफ हुई शिकायतों से बौखलाए विकासखंड शिक्षा अधिकारी संजीव शुक्ला अपने खिलाफ शिकायत करने वाले शिक्षकों को विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित करते रहे हैं। इसकी एक बानगी तब दिखाई थी जब गौरेला विकासखंड के एक शिक्षक नेता अमिताभ चटर्जी ने शिक्षकों के शोषण एवं अनियमित की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी गौरेला पेंड्रा मरवाही जगदीश शास्त्री को सहायक शिक्षक फेडरेशन के पदाधिकारी के साथ जाकर की थी इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी जगदीश प्रसाद शास्त्री ने इस संबंध में संबंधित शिक्षा अधिकारी को शिकायतो का निराकरण करने का निर्देश दिया था परंतु उसके बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी संजीव शुक्ला बदले की भावना से कार्यवाही करते हुए शिक्षक नेता अमिताभ चटर्जी के स्कूल में जाकर तरह-तरह की अनियमिताओं की खोज की। अमिताभ चटर्जी के स्कूल में जाने के 1 दिन पूर्व विकासखंड शिक्षा अधिकारी संजीव शुक्ला अमिताभ चटर्जी के भाई के एक निजी स्कूल भी जांच के नाम पर पहुंच गए और तरह-तरह की अनियमिताओं की खोज करते हुए चटर्जी बंधूओ पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया ताकि वे अन्याय के खिलाफ बोल ना पाए और शिक्षकों पर अत्याचार और शोषण चलता रहे।


