गणतंत्र दिवस खास

गणतंत्र दिवस खास

हर देश की कार्यपालिका न्याय पालिका और व्यस्थापिका को चलाने के लिये संविधान की अहम भूमिका होती है, आज का दिन हम सभी भारतीयों के लिये बेहद खास दिन है, आज ही के दिन 1950 में पहली बार देश के संविधान को अमूर्तरूप प्रदान किया गया था. इसीलिए इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में जाना जाता है. विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक भारत की बहुरंगी विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है.

कहा जाता है कि भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है. बता दें कि जब देश को सन् 1950 में 26 जनवरी को संविधान मिला, इसके बाद भारत एक लोकतांत्रिक और गणतंत्र देश घोषित हुआ. इस दिन भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के बाद देश को उसका संविधान सौंपा था. उसके बाद से हर साल यह दिन देश में हर्षोल्लास से मनाया जाता है.

इस खास मौके पर स्कूल, कॉलेजों व दफ्तरों में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है.वहीं, कई जगहों पर भाषण, वाद-विवाद व निबंध प्रतियोगिताएं भी करायी जाती हैं.

भारत के तीन महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्वों में से एक है, 26 जनवरी. 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में पूरे देश में काफी जोश और सम्मान के साथ मनाया जाता है. यह, वह दिन है जब भारत में गणतंत्र और संविधान लागू हुआ था. यही कारण है कि इस दिन को हमारे देश के आत्मगौरव तथा सम्मान से भी जोड़ा जाता है. इस दिन देश भर में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जाते और खासतौर से विद्यालयों तथा सरकारी कार्यलयों में इसे काफी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है तथा इसके उपलक्ष्य में भाषण, निबंध लेखन और कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है.

हर साल 26 जनवरी को भारत अपना गणतंत्र दिवस मनाता है क्योंकि इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ था. इसे हम सभी राष्ट्रीय पर्व के रुप में मनाते है और इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है.

 

गणतंत्र दिवस
“जो भरा नहीं है भावों से, जिसमें बहती रसधार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”

इस महान दिन पर भारतीय सेना द्वारा भव्य परेड किया जाता है जो सामान्यत: विजय चौक से शुरु होकर इंडिया गेट पर खत्म होती है. इस दौरान सेना (थल, जल, और नभ) तथा अर्द्वाधसैनिक बालों द्वारा राष्ट्रपति को सलामी दी जाती है, साथ ही सेना द्वारा अत्याधुनिक हथियारों और टैंकों का प्रदर्शन भी किया जाता है, परेड के बाद देश के सभी राज्यों द्वारा झाँकियों के माध्यम से अपने संस्कृति और परंपरा की प्रस्तुति की जाती है. इसके बाद, भारतीय वायु सेना द्वारा हमारे राष्ट्रीय झंडे के रंगों (केसरिया, सफेद, और हरा) की तरह आसमान से फूलों की बारिश की जाती है.


गणतंत्र दिवस का इतिहास

आजादी के बाद एक ड्राफ्टिंग कमेटी को 28 अगस्त 1947 की मीटिंग में भारत के स्थायी संविधान का प्रारुप तैयार करने को कहा गया. 4 नवंबर 1947 को डॉ बी.आर.अंबेडकर की अध्यक्षता में भारतीय संविधान के प्रारुप को सदन में रखा गया। 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन में संविधान बनकर तैयार हुआ. आखिरकार इंतजार की घड़ी 26 जनवरी 1950 को इसको लागू होने के साथ ही खत्म हुई. साथ ही पूर्णं स्वराज की प्रतिज्ञा का भी सम्मान हुआ.

Akhilesh Namdeo