अनुसूचित जनजाति जाति एवं पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को शिक्षा एवं छात्रवृत्ति के लिए जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार प्रधान पाठक एवं प्राचार्य को मिले

छत्तीसगढ़ विधानसभा में लाया जाए संशोधन विधेयक

छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण पत्र बनवाना आग के दरिया में डूब के जाने के समान

अखिलेश नामदेव

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को शिक्षा एवं छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के लिए संबंधित संस्था प्रमुख हेड मास्टर एवं प्राचार्य को जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार दिया जाए। तहसील कार्यालय से जाति प्रमाण पत्र बनने की कठिन प्रक्रिया एवं देरी के कारण इन वर्ग के छात्र-छात्राओं को शिक्षा एवं छात्रवृत्ति पाने में दिक्कत हो रही है ऐसे में आप जरूरी है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में एक संशोधन विधेयक लाकर शिक्षा एवं छात्रवृत्ति के लिए जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार संस्था प्रमुख को दिया जाए।

अनुसूचित जनजाति जाति एवं पिछड़ा वर्ग बाहुल्य राज्य छत्तीसगढ़ में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए जाति प्रमाण पत्र की समस्या एक बहुत बड़ी बाधा बन गई है। जाति प्रमाण पत्र के अभाव में छात्र-छात्राओं को शिक्षा एवं छात्रवृत्ति संबंधी किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल पाता तथा छात्र-छात्राओं को भयंकर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है तथा कई बार उन्हें शिक्षा एवं छात्रवृत्ति से वंचित होना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार लगातार चाहती रही है कि छात्र-छात्राओं को शिक्षा एवं छात्रवृत्ति का लाभ मिले परंतु इसमें एक बड़ी बाधा जाति प्रमाण पत्र बनने की समस्या है। सरकार ने छात्र-छात्राओं के जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए स्कूलों को माध्यम बनाकर अपने तरह से कोशिश की है ताकि कि छात्र-छात्राओं को जाति प्रमाणपत्र मिल सके इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण पत्र हासिल करना” एक आग का दरिया और डूब के जाने के समान है “। इसका कारण यह है कि तहसील कार्यालय से जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया अत्यंत कठिन है जितने दस्तावेज जाति प्रमाण पत्र के लिए चाहिए और जो प्रक्रिया है उसे इस वर्ग के छात्र-छात्राओं के ज्यादातर पालक पूरा नहीं कर पाते यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में अब अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग की छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में काफी कमी आई है ‌ तथा सरकारी योजनाओं से वंचित हो रहे हैं।इस वर्ग के पड़े एवं संपन्न लोग ही कोशिश करके जाति प्रमाण पत्र बनवाकर शिक्षा एवं छात्रवृत्ति का लाभ ले पा रहे हैं परंतु ग्रामीण अंचल खासकर अनुसूचित क्षेत्रों में जहां 20 से 30 किलोमीटर की परिधि में पटवारी एवं तहसीलदार रहते हैं वहां जाति प्रमाण पत्र के लिए प्रतिवेदन बनवाना, मिशल निकलवाना ,वंश वृक्ष बनवाना, नोटरी से शपथ पत्र बनवाना प्राथमिक विद्यालय से दाखिल खारिज निकलवाना उसके बाद संस्था प्रमुख के माध्यम से उसे तहसील कार्यालय भिजवाना इत्यादि कठिन प्रक्रिया से गुजरने के बजाय अब इस वर्ग के छात्र छात्राएं और उनके पालक छात्रवृत्ति नहीं लेना बेहतर समझ रहे हैं।

ऐसे में अब जरूरी है कि छत्तीसगढ़ में शिक्षा को बढ़ावा एवं अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ा वर्ग के लोगों को छात्रवृत्ति का एवं अन्य सरकारी शैक्षिक योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया का सरलीकरण हो तथा छात्र जिस विद्यालय में पढ़ता है वहां के संस्था प्रमुख प्राथमिक शाला, मिडिल स्कूल हेड मास्टर तथा हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी प्राचार्य को जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार दिया जाए। या संस्था प्रमुख द्वारा छात्र का जाति प्रमाणित करते हुए तहसील दार को भेजे गए आवेदनों पर त्वरित कार्यवाही करते हुए छात्र-छात्राओं का जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाए। छात्र-छात्राओं के व्यापक हितों को देखते हुए सरकार का यह बड़ा निर्णय होगा।उल्लेखनीय है कि अभी सरकार ने प्री मैट्रिक छात्रावास में यह व्यवस्था दी है कि जो छात्र-छात्राएं तहसीलदार का जाति प्रमाण पत्र लेंगे उन्हें छात्रवृत्ति योजना का पूरा लाभ मिलेगा और जो सिर्फ सरपंच का जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेंगे उन्हें आधा लाभ मिलेगा ऐसे में समझा जा सकता है कि जाति प्रमाण पत्र छात्र छात्राओं के लिए कितनी बड़ी समस्या बनी हुई है।

इसलिए जारी नहीं हो पाता जाति प्रमाण पत्र

दरअसल जाति प्रमाण पत्र हासिल करने में जो विसंगतियां है उसे लोग समझ ही नहीं पा रहे हैं और ना ही सरकार। एक ओर सरकार ने छात्र-छात्राओं को जाति प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए संबंधित संस्था प्रमुख को माध्यम बनाते हुए उसे बार-बार निर्देशित किया जाता है कि वह छात्रों से जाति प्रमाण पत्र हेतु उल्लेखित दस्तावेज प्राप्त कर आवेदन तहसील कार्यालय में जमा करवाए। इसके लिए प्राचार्य एवं शिक्षक प्रयत्न भी करते हैं परंतु छात्र-छात्राओं के लिए पटवारी से उचित दस्तावेज खासकर मिसल बंदोबस्त खसरा बी वन,वंश वृक्ष प्राप्त करना टेढ़ी खीर होती है। छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति वर्ग में गरीबी अशिक्षा सहित सामाजिक ताने-बाने में व्याप्त समस्याओं के कारण छात्र-छात्राएं तमाम तरह की समस्याओं से घिरे रहते हैं। छात्र-छात्राएं रहते कहीं हैं, पढ़ते कहीं है जिसके कारण उन्हें दस्तावेज प्राप्त करने में काफी तकलीफें होती हैं। जबकि प्रशासन संस्था प्रमुख पर लगातार जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए दबाव डालता है ऐसे में शासन एवं प्रशासन को समझना चाहिए कि जो तहसीलदार जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत है और जो दस्तावेज जाति प्रमाण पत्र के लिए चाहिए वह दस्तावेज उसी के अधीनस्थ पटवारी के द्वारा जारी होता है तब छात्र-छात्राओं के आवेदन आने के बाद तहसीलदार स्वयं संबंधित पटवारी को निर्देशित करके उपरोक्त दस्तावेज क्यों नहीं मंगा लेते? ताकि छात्र-छात्राओं को समय पर जाति प्रमाण पत्र जारी किया जा सके परंतु इसके उलट प्रशासन शिक्षकों एवं संस्था प्रमुख पर दबाव बनाता है कि वह पटवारी को पकड़े छात्र-छात्राओं के घर जाएं उनसे फॉर्म भराए दस्तावेज एकत्रित करें तथा उसे तहसीलदार कार्यालय में जमा कराए। जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने के अनेक प्रकरणों में देखा गया है कि संस्था प्रमुख द्वारा छात्र-छात्राओं को बार-बार दस्तावेज लाने के लिए कई बार वे पढ़ाई तक छोड़ देते हैं तथा स्कूल आना बंद कर देते हैं। कई छात्र-छात्राएं तो जाति प्रमाण पत्र बनाने की जटिल प्रक्रिया को देखते हुए यह कह देते हैं कि उन्हें छात्रवृत्ति नहीं चाहिए।

जन्म के समय ही मिलने वाले जन्म प्रमाण पत्र के साथ जारी हो जाति प्रमाण पत्र

छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण पत्र के कारण अनुसूचित जाति जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के हित को ध्यान में रखते हुए सुझाव और मांग यह भी है कि बच्चों के जन्म के समय संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा जारी होने वाले जन्म प्रमाण पत्र के साथ ही जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए तथा उसे जाति प्रमाण पत्र के लिए प्रमुख दस्तावेज माना जाए। जन्म प्रमाण पत्र के साथ ही जाति प्रमाण पत्र जारी होने से समस्या का समाधान हो सकता है।

छत्तीसगढ़ के बजट सत्र में आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से है इस मामले में उम्मीद

उल्लेखनीय की अनुसूचित जनजाति बाहुल्य राज्य छत्तीसगढ़ में नए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बने हैं जो की वनांचलों एवं ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले जनजाति वर्ग की समस्याओं से भली भांति अवगत है। इस समस्या के समाधान के लिए उनसे उम्मीद की जा रही है कि वह अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग तथा पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं की समस्या को समझते हुए आगामी 5 फरवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र में संशोधन विधेयक के माध्यम से जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया का सरलीकरण करते हुए शिक्षा एवं छात्रवृत्ति तथा अन्य योजनाओं के लिए जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार संस्था प्रमुखों को देवे।

Akhilesh Namdeo

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