कंगाल हुआ पाकिस्तान, IMF के सामने फैलाया कटोरा
वैश्विक महामारी (कोरोना) ने संपूर्ण देशों की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ कर रख दी है. बहुत से देश आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं. मौजूदा हालात में आर्थिक तंगी से जूझ रहा पड़ोसी देश पाकिस्तान भी अब कंगाली के कगार पर खड़ा है. जिसको लेकर अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के ऊपर तलवार लटक रही है.
इमरान का नया वाला पाकिस्तान
जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान सत्ता में आने के लिए चुनाव प्रचार कर रहे थे, तो उन्होंने पाकिस्तान की आवाम से वादा किया था कि वो नया पाकिस्तान बनाएंगे. सच में पाकिस्तान अब बिल्कुल नया-सा हो गया है और पूरी तरीके से कर्ज में डूब गया है.
सत्ता में आने से पहले इमरान खान ने पाकिस्तान की जनता से वादा किया था कि वह विदेशी संस्थाओं से पाकिस्तान की कर्ज लेने की परंपरा पर रोक लगाएंगे. लेकिन अब तो इमरान खान खुद कर्ज पर कर्ज लिये जा रहे हैं. अब उनके कर्ज लेने का ऐसा ही एक और मामला सामने आया है, वो है अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से क़र्ज़ लेने का. पाकिस्तान 50 करोड़ डॉलर क़र्ज़ लेने जा रहा है. गौर करने वाली बात यह है कि वो भी उस स्थिति में, जब हर पाकिस्तानी नागरिक करीब-करीब दो लाख पाकिस्तानी रुपए के क़र्ज़ में डूबा हुआ है.
पाकिस्तान सरकार और आई.एम.एफ़ के बीच मंगलवार को बहुत से सुधारों को लेकर एक समझौता हुआ है. समझौते के बाद आई.एम.एफ़ पाकिस्तान को 50 करोड़ डॉलर देने के लिए राजी हो गया है. पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस क़र्ज़ से अर्थव्यवस्था को सुधारा जाएगा. मंत्री हमाद अजहर ने कहा है कि ये पाकिस्तान के लिए बहुत ही बड़ी खुशख़बरी है.
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इससे अभी कुछ दिनों पहले ही, पाकिस्तान की संसद में इमरान खान सरकार ने यह कबूल किया था कि अब हर पाकिस्तान के ऊपर लगभग दो लाख पाकिस्तानी रुपए का कर्ज है. इस कर्ज को लेने में इमरान सरकार का महत्वपूर्ण योगदान है.
देश के कानून का हुआ उल्लंघन
वित्तीय वर्ष 2020- 21 के राजकोषीय नीति पर बयान देते हुए पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने यह भी माना कि इमरान सरकार राजकोषीय घाटे को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के 4 फ़ीसदी तक करने में विफल रही है. वर्ष 2005 की राजकोषीय ज़िम्मेदारी और ऋण सीमा नियम का उल्लंघन इमरान सरकार ने किया है. पाकिस्तान का कुल राजकोषीय घाटा जीडीपी का 8.6 फीसदी रहा है, जो एफ.आर.डी.एल अधिनियम कानून की सीमा से दोगुने से भी अधिक है.
क्या है पाकिस्तान का F.R.D.L. कानून
पाकिस्तान की संसद में एफ.आर.डी.एल. कानून को 2005 में पारित किया गया था. पारित करने की वजह पाकिस्तान के ऊपर बढ़ते विदेशी कर्ज से निपटना था. इस कानून में प्रावधान है कि राजकोषीय घाटा देश की अर्थव्यवस्था से 4 फीसदी से अधिक न हो. इसमें यह भी कहा गया है कि राजकोष को लेकर सरकार की सभी नीतियों का गहराई से अध्ययन किया जाए.
पाकिस्तान की सरकार ने आवाम से छुपाई जानकारी
पाकिस्तान की संसद में गुरुवार को एक रिपोर्ट पेश की गयी थी, जिसे पाकिस्तान के अब तक के इतिहास में सबसे कम जानकारी वाला नीतिगत बयान बताया जा रहा है. अधिकारियों ने दावा किया है कि ऋण नीति कार्यालय ने वित्त मंत्रालय को नीति का एक विस्तृत मसौदा पेश किया था लेकिन उनको यह आदेश दिया गया था कि शीर्षक के साथ इस रिपोर्ट को केवल 11 पन्नों में ही समेट दिया जाए.

