राष्ट्र गान जन गण मन के रचयिता गुरुदेव कविवर रविंद्र नाथ टैगोर जी के 83 पुण्यतिथि पर प्रतिमा पर पुष्पांजलि कार्यक्रम, जिले के जनप्रतिनिधि एवं पत्रकारों ने श्रद्धांजलि अर्पित की

राज्य शासन से मांग गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर की पत्नी श्रीमती मृणालिनी देवी टैगोर के नाम पर सेनेटोरियम में मेडिकल कॉलेज स्थापित हो

गौरेला पेंड्रा मरवाही अखिलेश नामदेव

गौरेला पेंड्रा मरवाही की माटी से जुड़े ज्यादातर लोग जानते हैं कि गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर का भावनात्मक संबंध इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। उनकी यादें इस नर्मदा अंचल से जुड़ी हुई है।वर्ष 1901-02 के आसपास गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर का पेंड्रा की सेनेटोरियम आना जाना रहा। दरअसल उन दिनों सेनेटोरियम एशिया का जाना माना टीवी का अस्पताल था। साल वनों से आच्छादित एवं कलकल बहती नदियों के कारण पेंड्रा अंचल आबोहवा स्वास्थ्य के लिए उत्तम है और यही उत्तम आबोहवा टीवी के रोगियों के लिए रामबाण का काम करती थी। उस दौर में टीवी बहुत कठिन और लाइलाज बीमारी थी। गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर की पत्नी श्रीमती मृणालिनी देवी टैगोर टीवी के रोग से ग्रसित थी। गुरुदेव बीमार पत्नी का इलाज कराने सेनेटोरियम आए थे ।यहां काफी समय इलाज के बाद भी स्वस्थ नहीं हुई और 23 नवंबर 1902 को मृणालिनी देवी जी का 28 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गुरुदेव के जीवन की यह कष्टकारी घटना थी। उन्होंने यही उनका अंतिम संस्कार किया और पत्नी की यादों के साथ वे खाली हाथ कोलकाता लौट गए। इस लिहाज से कह सकते है कि गुरुदेव का गौरेला पेंड्रा मरवाही से भावनात्मक लगाव क्यों ना रहा होगा ?

वर्ष 2020 में 10 फरवरी को जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पेंड्रा में अरपा महोत्सव कार्यक्रम में आए थे तो उन्होंने पेंड्रा की नदियों के महत्व को रेखांकित करते हुए यहां की आबोहवा जलवायु मौसम की काफी प्रशंसा की थी और उन्होंने इस अवसर पर गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर के इस क्षेत्र में प्रवास को याद करते हुए कहा था कि आने वाले समय में उनकी स्मृतियों को लेकर भी यहां कार्यक्रम आयोजित किए जाएं और उनकी स्मृतियों को चिरस्थाई बनाया जाए। इसकी एक कड़ी के रूप में सेनेटोरियम परिसर में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की प्रतिमा बीते 6 मई को उनके जन्मदिवस अवसर पर स्थापित की गई है।

उनके पुण्यतिथि के अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने वर्तमान जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही कलेक्टर मुख्यालय के सामने रविंद्र परिसर में स्थित मातृ शिशु चिकित्सालय जो अब गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले का जिला चिकित्सालय बन चुका है उसे राज्य शासन मेडिकल कॉलेज के रूप में स्थापित कर उसका नाम गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर की पत्नी श्रीमती मृणालिनी देवी टैगोर के नाम पर रखने की मांग की है, ताकि गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर से जुड़ी उनकी अर्धांगिनी की स्मृति चिरस्थाई बनाया जा सके।गुरुदेव के पुण्यतिथि पर यह नर्मदा अंचल की अनमोल भेंट ही होगी। छत्तीसगढ़ सरकार और जिला प्रशासन गौरेला पेंड्रा मरवाही को इस पर विचार करना चाहिए । आज 7 अगस्त को जिले के पत्रकारों एवं जनप्रतिनिधियों की प्रतिमा स्थल और बरगद चबूतरे की साफ-सफाई कर गुरुदेव को याद किया तथा छत्तीसगढ़ शासन एवं प्रशासन से हर साल जिले में टैगोर महोत्सव मनाया जाने की मांग की है।

Akhilesh Namdeo

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