93 वर्ष की आयु में ब्रह्मलीन हुए संत महंत गुरु चरण दास महाराज,
सिद्ध बाबा पहाड़ी स्थित श्री राम-जानकी मंदिर के संस्थापक थे, 2 मार्च को दी जाएगी समाधि
त्याग, तपस्या और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में जीवन किया समर्पित

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
जिले के प्रसिद्ध संत एवं श्री गुरु चरण दास महाराज का 93 वर्ष की आयु में रविवार 1 मार्च 2026 को दोपहर लगभग 1:15 बजे ब्रह्मलीन हो गया। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है। वे सिद्ध बाबा पहाड़ी स्थित श्री राम जानकी मंदिर के प्रथम पीठाधीश्वर थे।
महंत गुरु चरण दास महाराज का पार्थिव शरीर श्रद्धालुओं के अंतिम दर्शन के लिए मंदिर आश्रम में रखा गया है। उनका अंतिम संस्कार एवं समाधि कार्यक्रम सोमवार 2 मार्च 2026 को सुबह लगभग 10 बजे सिद्ध बाबा पहाड़ी में ही किया जाएगा।

त्याग और तपस्या से बनाया सिद्ध बाबा पहाड़ी को आध्यात्मिक केंद्र
सोन नदी तट स्थित सिद्ध बाबा पहाड़ी में महंत गुरु चरण दास महाराज ने अपने त्याग और तपस्या के बल पर मंदिर समूह का निर्माण कराया। यहां प्रमुख रूप से श्री राम-जानकी-लक्ष्मण दरबार मंदिर स्थापित है। इसके साथ ही श्री लक्ष्मी-नारायण, श्री द्वारिकाधीश-रुक्मणी, श्री राधा-कृष्ण और श्री अंबाजी मंदिर भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। पहाड़ी पर दक्षिण मुखी हनुमान जी का मंदिर भी स्थापित है।
महंत जी ने यहां एक धर्मशाला का निर्माण भी कराया था, जिससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके।

1994 में हुआ था बड़ा यज्ञ, फिर हुआ मंदिरों का नव निर्माण
बताया जाता है कि वर्ष 1994 में इस स्थान पर प्रसिद्ध संत त्यागी जी महाराज द्वारा भव्य यज्ञ का आयोजन किया गया था। इसके बाद लगभग वर्ष 2000 के आसपास महंत गुरु चरण दास जी ने यहां मंदिरों के नव निर्माण का कार्य कराया और इस स्थान को एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में विकसित किया।

मध्यप्रदेश में हुआ जन्म, शिक्षक से बने संत
महंत गुरु चरण दास महाराज का जन्म 18 नवंबर 1933 को अमरपाटन क्षेत्र के पड़हा ग्राम में पंडित राम खेलावन शुक्ल के रूप में हुआ था। वे प्रख्यात विद्वान पंडित रामपबकस शुक्ल के परिवार से संबंध रखते थे। वर्ष 1947 में मिडिल स्कूल उत्तीर्ण करने के बाद 1949 में शिक्षक बने और 1951 में रीवा के वेंकट संस्कृत विद्यालय से संस्कृत की मध्यमा परीक्षा उत्तीर्ण की।
करीब 45 वर्ष की आयु में उन्होंने गृहस्थ जीवन का त्याग कर चित्रकूट स्थित निर्मोही अखाड़ा के संत स्वामी रामाश्रय दास से दीक्षा लेकर संन्यास धारण किया और गुरु चरण दास महाराज के नाम से विख्यात हुए।

संस्कृत और संगीत विद्यालय खोलने की थी इच्छा
महंत गुरु चरण दास महाराज की इच्छा थी कि सिद्ध बाबा पहाड़ी में संस्कृत विद्यालय और संगीत विद्यालय की स्थापना हो, ताकि धार्मिक एवं सांस्कृतिक शिक्षा को बढ़ावा मिल सके। इसके साथ ही वे यहां वृद्धाश्रम और विधवा आश्रम भी संचालित करना चाहते थे।

उनके निधन की खबर से गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले सहित छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में शोक की लहर है। उनके शिष्य और श्रद्धालु उन्हें सनातन धर्म के समर्पित संत और महान तपस्वी के रूप में याद कर रहे हैं।

