छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के निर्णय एवं छत्तीसगढ़ की नई सरकार की मजबूत इच्छा शक्ति से ही बचेगी पेंड्रा से निकली अरपा नदी का उद्गम
10 फरवरी गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला स्थापना दिवस एवं अरपा महोत्सव पर विशेष

अरपा उद्गम बचाओ संघर्ष समिति पेंड्रा, बिलासा कलामंच बिलासपुर का अरपा बचाओ अभियान तथा बिलासपुर के अधिवक्ताओं ने तो निभा दिया अपना फर्ज
अरपा उद्गम पेंड्रा के संरक्षण के लिए पूर्ववर्ती छत्तीसगढ़ सरकार ने हाई कोर्ट बिलासपुर में प्रस्तुत की थी करोड़ों की योजनाएं, अब संरक्षण का दारोमदार नई सरकार पर
अखिलेश नामदेव
गौरेला पेंड्रा मरवाही
अरपा नदी के पेंड्रा स्थित उद्गम के संरक्षण के लिए वर्ष 2016 से अरपा उद्गम बचाओ संघर्ष समिति पेंड्रा एवं बिलासा कला मंच बिलासपुर ने लगभग 20 वर्षों से जो अरपा बचाओ अभियान चलाया था वह अब एक महाअभियान बन चुका है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 10 फरवरी को पेंड्रा में आयोजित होने वाले अरपा महोत्सव ने अरपा नदी के प्रति जन चेतना का संचार किया है वही पर्यावरण प्रेमी बिलासपुर के अधिवक्ताओं की जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट बिलासपुर के निर्देश पर पूर्ववर्ती छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पेंड्रा स्थित अरपा उद्गम सहित पूरी अरपा नदी के संरक्षण की जो कार्य योजना प्रस्तुत की थी उससे अरपा नदी के प्रेमियों में उम्मीद तो है परंतु अब अरपा नदी के उद्गम एवं पूरी अरपा नदी के संरक्षण का दारोमदार छत्तीसगढ़ भाजपा की नई विष्णु देव सरकार पर है। कल 10 फरवरी को पेंड्रा में आयोजित अरपा महोत्सव में छत्तीसगढ़ की नई सरकार के नुमाइंदों के आगमन पर सरकार की अरपा नदी के प्रति नीति स्पष्ट हो जाएगी। इसलिए स्वाभाविक रूप से पेंड्रावासियों को छत्तीसगढ़ की सरकार से उम्मीद है कि
एक न एक दिन अरपा उद्गम सहित संगम तक पूरी अरपा नदी के दिन बहुरेंगे और वह दिन भी आएगा जब पेंड्रा से बिलासपुर तक स्वच्छ निर्मल कल कल छल छल अरपा बहेगी।

छत्तीसगढ़ के पूर्ववर्ती सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 2018 में अपनी सरकार बनाने के साथ ही “अरपा पैरी के धार” छत्तीसगढ़ी गीत को राज गीत का दर्जा तथा बाद में 10 फरवरी 2020 को गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के स्थापना दिवस कार्यक्रम में पेंड्रा में महोत्सव मनाने की घोषणा करके ही अरपा नदी के प्रति अपने प्रेम को प्रकट कर दिया था परंतु अब अरपा के उद्धार के आगे का दारोमदार छत्तीसगढ़ में भाजपा की नई विष्णु देव सरकार पर है। अरपा नदी के प्रति छत्तीसगढ़ की नई भाजपा सरकार की क्या नीति है यह अरपा महोत्सव कार्यक्रम में स्पष्ट होगा।

छत्तीसगढ़ के 28 वें जिले गौरेला पेंड्रा मरवाही से लगभग 8 नदियों का उद्गम हुआ है जिसमें सोन ,अरपा, तान, तिपान , बम्हनी,जोहिला ,मलानिया, एलान नदी शामिल है तथा इससे भी अधिक नाले इस इलाके में बहते हैं जो गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले को हरा भरा एवं खूबसूरत बनाते हैं। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के पश्चिम में अमरकंटक की पहाड़ी पूर्व में बस्ती बंगरा दक्षिण में कारी आम और अचानकमार की पहाड़ियां तथा जंगल और इनमें कल कल बहते नदी नाले गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की खूबसूरती पर चार चांद लगाते हैं। नदियों को जीवनदायिनी कहा जाता है परंतु नदियों का उद्गम राजस्व रिकॉर्ड में चिन्हित नहीं होने के कारण अपने अस्तित्व का संकट झेल रहा है। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के पेंड्रा से निकलने वाली जीवनदायिनी नदीअरपा की भी यही कहानी है जिसके उद्गम पर संकट मंडरा रहा है।

अविभाजित बिलासपुर जिले की जीवनदायिनी अरपा नदी का उद्गम नवगठित जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही के पेंड्रा शहर से सटे ग्राम अमरपुर मार्ग पर 1 किलोमीटर की दूरी पर नगर पंचायत पेंड्रा के वार्ड नंबर 13 में पुलिया के बाई और स्थित एक खेत से निकलती है। यह स्थान पेंड्रा का उच्च सम भूमि कहलाता है। अरपा नदी पेंड्रा से निकलकर 147 किलोमीटर चलकर बिलासपुर शहर के आगे मंगला पासीद के पास जाकर शिवनाथ नदी में मिल जाती है। अरपा उद्गम पेंड्रा से संगम स्थल मंगला पासीद तक लगभग 40 छोटे बड़े नदी नालो को अपने में समाहित करते हुए चलती है। अरपा में पूरे वर्ष भर पानी नहीं रहता इसीलिए इसे अंतःसलिला कहा जाता है।

नवगठित जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही के पेंड्रा नगर और ग्राम अमरपुर के बीच से निकली अरपा ग्राम ललाती धनगवां, सधवानी, गांव से होती हुई खोडरी पहुंचती है। खोडरी के पास अरपा नदी में मलनिया नदी मिल जाती है। अरपा में मिलने से पहले मलनिया में अमरकंटक के सोनमूड़ा के पहाड़ से निकलने वाले सोनकछार नाला खोडरी रेलवे पुल के पहले मिल जाता है। इस तरह मलानिया बड़ी जल राशि लेकर अरपा नदी में मिलती है और इस तरह अरपा को पूर्ण स्वरूप प्राप्त होता है। खोडरी के आगे अरपा नदी में लक्ष्मण धारा नामक जलप्रपात है जो सुंदर प्राकृतिक स्थल है यहां लोग जल क्रीड़ा एवं पिकनिक के लिए पहुंचते हैं। पत्थरों के बीच से अरपा नदी की कूद फांद मनोरम दृश्य उत्पन्न करता है।

खोडरी से घने जंगलों के बीच से पहाड़ और पत्थरों से उछलते कूदते हुए अरपा खोंगसरा पहुंचती है। खोडरी और खोंगसरा के बीच अरपा में टेड़गी नाला, माटी नाला आ मिलता है। यह नाले अपने साथ बड़ी जल राशि लेकर अरपा में मिलते हैं। खोंगसरा के आगे सरगोड़ नाला, सुखनइया नाला अरपा में मिलता है। आगे शक्ति घाट कोनचरा, केंदा बेलगहना गांवों से होते हुए अरपा छतौना, चपोरा, खैरा, रतनपुर, सेंदरी, कोनी होते हुए बिलासपुर शहर में प्रवेश करती है तथा सरकंडा, चांटीडीह, चिंगराजपारा, लिंगियाडीह, तोरवा, दोमुहानी ,दर्रीघाट, पहुंचती है। दर्रीघाट के पहले ही अरपा में खारंग नदी मिलती है। धूमा ,सिलपहरी, पोंड़ी, मगरउछल्ला, सर्वानी, पिरैया, पासीद, मंगला के पास शिवनाथ नदी में मिल जाती है और संगम का निर्माण करती है।

लगभग 147 किलोमीटर लंबी अरपा नदी में उद्गम पेंड्रा से लेकर संगम तक सिंचाई विभाग द्वारा अनेक सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण किया गया है जिसमें से प्रमुख अरपा भैसाझार सिंचाई परियोजना है। इसके अलावा सलका उद्भवहन सिंचाई योजना, खोंगसरा व्यपवर्तन योजना, आमामूड़ा व्यपवर्तन योजना, लछनपुर व्यपवर्तन योजना, बिलासपुर व्यपवर्तन योजना, चांटापारा एनीकट, करही कछार एनीकट, दोमुहानी एनीकट का निर्माण किया जा चुका है तथा बिलासपुर में छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार दो बड़े बैराज का निर्माण करा रही है जिसका कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। बिलासपुर शहर के बीच इन दोनों बैराजों के बनने से बिलासपुर की तस्वीर बदलने वाली है। यह सही है कि बीते तीन दशक के भीतर अरपा नदी की हालत बहुत खराब हुई है। जगह-जगह रेत उत्खनन से अरपा नदी बंजर नदी के रूप में तब्दील हो रही थी इसमें मिलने वाले गंदे नाले अरपा नदी को प्रदूषित कर रहे थे। अरपा नदी के उद्गम स्थल पेंड्रा में नगर पंचायत पेंड्रा द्वारा बीते 40 वर्षों से लगभग 12 बोरवेल्स लगा कर पेंड्रा नगर को पेयजल की आपूर्ति करने के कारण अरपा नदी का उद्गम सूख गया है। हद तो तब हो गई थी जब वर्ष 2016 में पेंड्रा केअरपा उद्गम को पाट दिया गया था जिसके बाद पेंड्रा में अरपा उद्गम बचाओ संघर्ष समिति ने बिलासा कला मंच बिलासपुर के अरपा बचाओ अभियान से कदम से कदम मिलाकर अरपा उद्गम को बचाने के लिए जो जन आंदोलन खड़ा किया उससे समाज के सभी वर्गों का ध्यान अरपा के प्रति आकृष्ट हुआ। लगातार संघर्ष के बाद अरपा नदी के उद्गम स्थल से लेकर संगम तक बारहमासी पानी के बहाव की योजना के तहत छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती सरकार द्वारा अरपा बेसिन विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है । इसके अलावा तत्कालीन छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अरपा के प्रति सम्मान का भाव प्रकट करते हुए छत्तीसगढ़िया कवि नरेंद्र वर्मा के गीत अरपा पैरी के धार को राज गीत का दर्जा दिया गया है। इसी के साथ नवगठित जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही के उद्घाटन अवसर 10 फरवरी 2020 को अरपा नदी के उद्गम स्थल पेंड्रा में अरपा महोत्सव मनाने का निर्णय किया गया जिसके बाद लगातार चौथी बार पेंड्रा में अरपा महोत्सव का आयोजन हो रहा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने मनसा जाहिर की थी कि पेंड्रा स्थित अरपा उद्गम को राजस्व रिकॉर्ड ओं में चिन्हित किया जाएगा।

पूर्ववर्ती छत्तीसगढ़ सरकार ने हाई कोर्ट बिलासपुर के समक्ष अरपा नदी के पेंड्रा स्थित उद्गम के संरक्षण के लिए 5 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की बात कहते हुए 150 लाख रुपए की लागत से अरपा उद्गम स्थल पर अमरपुर पेंड्रा में कुंड और स्टॉपडेम निर्माण, 110 लाख से अमरपुर में कुंड निर्माण के लिए 5 एकड़ भू-अर्जन, 200 लाख रुपए,ललाती व बरपारा के बीच रपटा सह स्टॉप डेम का निर्माण का प्रस्ताव दिया है। शासन स्तर पर जोगीसार में 290 लाख रुपए से जोगीसार एनीकट, खोडरी में 287 लाख से खोडरी एनीकट 1 व 280 लाख रुपए से खोड़री एनीकट-2, सधवानी में 450 लाख रुपए से सधवानी नवापारा जलाशय का प्रस्ताव भेजा गया है जिस पर हाई कोर्ट बिलासपुर ने छत्तीसगढ़ सरकार को पूरी योजना विधिवत प्लानिंग सहित प्रस्तुत करने के निर्देश दिए था इन सब गतिविधियों से अरपा नदी के प्रेमियों को उम्मीद बधी है कि जल्दी ही निकट भविष्य में अरपा नदी उद्गम स्थल पेंड्रा से लेकर शिवनाथ संगम तक कल कल छल छल बहेगी और अर्पा के दिन बहूरेंगे। जिसे कार्य रूप में परिणत करने की जवाबदारी छत्तीसगढ़ की नई भाजपा सरकार को है जिसके मुखिया विष्णु देव साय है। देखना है की छत्तीसगढ़ की नई सरकार हाई कोर्ट के निर्देश पर कब तक अरपा उद्गम को मुक्त कर पाते हैं।


