गंगा नदी की सहायक सोन नदी के उद्गम स्थल सोनमुड़ा पेंड्रा में आयोजित हुई नदी अध्ययन यात्रा एवं विमर्श,नदियों का संरक्षण सामूहिक जवाबदेही से ही संभव- रजनीश तिवारी जिला शिक्षा अधिकारी
भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून एवं राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन तथा अरपा उद्गम बचाओ संघर्ष समिति पेंड्रा का संयुक्त आयोजन

गौरेला पेंड्रा मरवाही
नदियां धरती के लिए वरदान है, नदियों के बगैर पृथ्वी में जीवन संभव नहीं था तभी तो देवताओं ने मान मनुहार करके नदियों को स्वर्ग से पृथ्वी पर उतारा। हमारा पूरा पर्यावरण एवं पुरी अर्थव्यवस्था नदियों पर ही आश्रित है। ऐसे में जरूरी है कि हम नदियों का संरक्षण करें और यह सामूहिक जवाबदेही से ही संभव है।
उक्त बातें गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून एवं राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन तथा अरपा उद्गम बचाओ संघर्ष समिति पेंड्रा के संयुक्त तत्वाधान में गंगा नदी की मुख्य सहायक नदी सोनमुड़ा सोनकुंड पेंड्रा में आयोजित नदी अध्ययन यात्रा एवं विमर्श कार्यक्रम में व्यक्त किये। श्री रजनीश तिवारी ने कहा कि भारत में नदियों को पवित्र पुण्यदायी माना गया है। नदिया जीवनदायिनी है। इसके बावजूद यहां नदियों का प्रदूषित होना उसमें अतिक्रमण अत्यंत चिंता का विषय है। नदियों का संरक्षण जरूरी है इसके लिए बुनियादी स्तर पर जन जागरूकता जरूरी है। नदियों का संरक्षण किसी एक के बस की बात नहीं है यह सामूहिक जवाब देही से ही संभव है। उन्होंने नदियों के संरक्षण की दिशा में अरपा उद्गम बचाव संघर्ष समिति पेंड्रा एवं अरपा बचाओ अभियान बिलासपुर के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में अनेक पवित्र नदियों का उद्गम हुआ है जो यहां के पर्यावरण को शुद्ध एवं हरा भरा रखते हैं। यहां के पर्यावरण, जैव विविधता एवं नदियो के उद्गम की बहुलता को देखते हुए जिला प्रशासन एवं छत्तीसगढ़ शासन गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले को पर्यटन जिला बनाने विशेष प्रयासरत है इससे यह जिला ना सिर्फ तरक्की करेगा बल्कि भारत के पर्यटन मानचित्र पर भी उभरेगा।

नदी अध्ययन यात्रा एवं विमर्श कार्यक्रम अवसर पर उपस्थित आत्मानंद विद्यालय सेमरा गौरेला के प्राचार्य एवं पर्यावरण विद डॉक्टर नरेंद्र तिवारी ने बताया कि भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून एवं राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की टीम बाल गंगा प्रहरी कार्यक्रम के लिए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, छत्तीसगढ़ का दौरा कर रही है। यह कार्यक्रम स्कूली बच्चों को नदी संरक्षण और गंगा नदी और इसकी सहायक नदियों की जैव विविधता के महत्व के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से है। टीम में शामिल राष्ट्रीय वन्य जीव संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक दानिश जी ने बताया कि बाल गंगा प्रहरी परियोजना “गंगा नदी बेसिन में जलीय प्रजाति संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के रखरखाव के लिए योजना और प्रबंधन” जल शक्ति मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय गंगा मिशन द्वारा वित्त पोषित है। राष्ट्रीय वन्य जीव प्राणी संस्थान एवं स्वच्छ गंगा मिशन कि यह टीम कुछ दिनों के लिए गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में रहेगी और सरकारी स्कूल के छात्रों और शिक्षकों के साथ जुड़कर इस क्षेत्र में नदी संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि इससे पहले, टीम ने सेमरा के आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में छात्रों और शिक्षकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया था और अब वहां एक नॉलेज सेंटर विकसित करने की योजना है, जो गंगा और सोन नदियों की पारिस्थितिकी और मिथक पर केंद्रित होगा।

वैज्ञानिक श्री दानिश ने कार्यक्रम के मुख्य बिंदु की चर्चा करते हुए बताया कि बाल गंगा प्रहरी कार्यक्रम स्कूली बच्चों को नदी संरक्षण के प्रति जागरूक करना।
-जलीय प्रजाति संरक्षण गंगा नदी और इसकी सहायक नदियों में जैव विविधता का संरक्षण तथा जागरूकता कार्यक्रम के तहत आत्मानंद विद्यालय सेमरा में छात्रों और शिक्षकों के लिए आयोजित करने के साथ आत्मानंद विद्यालय सेमरा में स्थापित किया जाएगा, जो गंगा और सोन नदियों की पारिस्थितिकी पर केंद्रित होगा। इसके अलावा वन्यजीव संस्थान ऑफ इंडिया और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन परियोजना का मुख्य उद्देश्य पारिस्थितिक और पारिस्थितिक-विषाक्तता अध्ययन*: नदियों के स्वास्थ्य और जैव विविधता का अध्ययन बचाव और पुनर्वास केंद्र विकास जलीय जीवन की सुरक्षा और संरक्षण के लिए केंद्र स्थापित करना साथ ही वन विभाग, मत्स्य पालन और सिंचाई विभाग तथा शैक्षणिक संस्थानों की क्षमता बढ़ाना।
स्थानीय समुदायों की भागीदारी गंगा प्रहरी कार्यक्रम के तहत स्थानीय समुदायों को शामिल करना और उन्हें नदी संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल नदियों की जैव विविधता का संरक्षण करना है, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी इस कार्य में शामिल करना है। इससे नदियों के स्वास्थ्य में सुधार होगा और भविष्य में उनके संरक्षण को सुनिश्चित किया जा सकेगा ।
इस अवसर पर अरपा उद्गम बचाओ संघर्ष समिति पेंड्रा के संरक्षक रामनिवास तिवारी ने अरपा उद्गम बचाओ संघर्ष समिति तथा अरपा बचाओ अभियान बिलासपुर के अरपा नदी के संरक्षण के लिए किया जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। नदी अध्ययन यात्रा एवं विमर्श कार्यक्रम की प्रस्तावना अरपा उद्गम बचाओ संघर्ष समिति पेंड्रा के संयोजक अक्षय नामदेव ने आगंतुक वैज्ञानिकों एवं विशिष्ट जनों को के समक्ष रखी तथा उन्होंने गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की प्रमुख नदियां सोन, अरपा, तान ,तिपान, बम्हनी,जोहिला, मलनिया जावस ऐलान , खुज्जी इत्यादि नदियों के उद्गम एवं संगम तथा उनके बहाव क्षेत्र पर प्रकाश डाला तथा कहां की जैसा पौराणिक महत्व उत्तराखंड का गंगा यमुना और सरस्वती नदी के कारण है वैसे ही पौराणिक महत्व गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले का इन नदियों के उद्गम के कारण है।
इस अवसर पर अक्षय नामदेव द्वारा सोन नदी सहित जिले के नदियों पर तैयार किया गया लघु शोध का वाचन किया गया एवं इस लघु शोध को जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने वैज्ञानिकों को सौंपा।
कार्यक्रम में अतिथियों का प्रतीकात्मक स्वागत किया गया। टीम की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी द्वारा रामनिवास तिवारी एवं अक्षय नामदेव तथा बनवाली प्रसाद वासुदेव को स्मृति चिन्ह प्रदान किया। टीम ने सोन नदी के उद्गम स्थल सोनमुड़ा परिसर एवं आश्रम का भी अवलोकन भ्रमण किया। सोन नदी के उद्गम सोनमुड़ा में आयोजित कार्यक्रम के पूर्व टीम ने अरपा उद्गम पेंड्रा का भी संयुक्त रूप से दौरा एवं निरीक्षण किया। इस व्हाट्सएप पर जिला शिक्षा अधिकारी राजनीति तिवारी, डॉ नरेंद्र तिवारी राष्ट्रीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक दानिश कलीम, अंशुल भावसार, कामरान हुसैन, पवन पाटिल और डाइट पेंड्रा के सहायक अध्यापक वनमाली प्रसाद वासुदेव एवं अरपा उद्गम बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य एवं पदाधिकारी सहित मानव तीर्थ सन कुंड के संचालक महिपाला नंद संतु पुरी एवं आश्रम के सदस्य उपस्थित थे।


