भारत का दूसरा हिमालय कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ से निकलने  वाली नदियां प्रकृति का है अनुपम वरदान

 विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को विशेष 


गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले से ही हुआ है 9 नदियों एवं दर्जनों नालों का उद्गम जो यहां के पर्यावरण को समृद्ध बनाते हैं..

साल वन से आच्छादित जिले में कल -कल बहते नदी नाले  खूबसूरती में लगाते हैं चार चांद

एशिया का ग्रीन बेल्ट के रूप में चिन्हित , पर्यावरण से समृद्ध स्वास्थ्यवर्धक जलवायु उत्तम आबोहवा के लिए प्रसिद्ध है यह इलाका

नदियों के संरक्षण से होगा पर्यटन का  विकास, बढ़ेंगे  रोजगार के अवसर


गौरेला पेंड्रा मरवाही

एशिया के ग्रीन बेल्ट के रूप में चिन्हित पर्यावरण से समृद्ध  गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला स्वास्थ्यवर्धक जलवायु, उत्तम आबोहवा के लिए जाना जाता है। कल-कल, छल-छल बहती यहां की नदियां तथा साल सागौन,तेंदू ,बीजा शीशम महुआ एवं दर्जनों किस्म के औषधीय वृक्ष इस क्षेत्र को पर्यावरण से समृद्ध बनाते हैं। विंध्याचल एवं सतपुड़ा के समवेत शिखर मैंकल पर्वत पर स्थित अमरकंटक से लगा छत्तीसगढ़ के 28वें  जिले गौरेला पेंड्रा मरवाही से लगभग 9 नदियों का उद्गम हुआ है जिसमें सोन ,अरपा, तान, तिपान , बम्हनी,जोहिला ,मलानिया, एलान, दुर्गा धारा एवं जावस नदी शामिल है तथा दर्जन भर से ज्यादा नाले इस इलाके में बहते हैं जो गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले को   हरा भरा एवं खूबसूरत तो बनाते बनाते ही है साथ-साथ यहां के पर्यावरण को भी समृद्धशाली बनाए रखे हुए हैं। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के पश्चिम में अमरकंटक की पहाड़ी ,पूर्व में बस्ती बगरा, दक्षिण में कारीआम और अचानकमार की पहाड़ियां तथा यहां आच्छादित साल वन और इनमें कल – कल बहते नदी नाले गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की खूबसूरती पर चार चांद लगाते हैं। जिले के चारों ओर  स्थित साल वनों के जंगलों के कारण ही  यह क्षेत्र एशिया का ग्रीन बेल्ट कहलाता है तथा इसकी पहचान अभी ठंडे क्षेत्रों में  है।

अमरकंटक की तराई में स्थित होने के कारण साथ में 9 नदियों के उद्गम क्षेत्र होने के कारण जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही का भारत के मानचित्र में अपना अलग महत्व है। जिस तरह से हिमालय की तराई में स्थित देवभूमि उत्तराखंड में गंगा यमुना एवं सरस्वती नदियों के उद्गम होने के कारण वहां का पर्यटन अत्यंत विकसित है तथा वहां पर्यटन के माध्यम से लोगों को बड़ा रोजगार मिला हुआ है। उत्तराखंड की तर्ज पर छत्तीसगढ़ भी दूसरा छोटा हिमालय है जहां से लगभग तीन दर्जन से ज्यादा नदियों का उद्गम हुआ है खासकर गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में नौं नदियों का उद्गम हुआ है जिसके कारण यहां पर भी पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं तथा पर्यटन व्यवसाय को विकसित कर यहां रोजगार सृजित किया जा सकता है। पेंड्रा से निकलने वाली अरपा नदी के महत्व को रेखांकित करते हुए पेंड्रा में प्रतिवर्ष अरपा महोत्सव मनाने की परंपरा की शुरुआत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा की गई है एवं वर्ष 2021 को गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले को पर्यटन जिला बनाने के साथ यहां पर्यटन विकास के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए काम किया जा रहा है जिससे क्षेत्र के उन लोगों में रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।



दरअसल गौरेला पेंड्रा मरवाही क्षेत्र की बनावट ऐसी है कि यहां से चारों दिशाओं में बहने वाली 9 नदियों का उद्गम हुआ है तथा दर्जनभर से ज्यादा नाले हैं जो यहां के पर्यावरण को हरा-भरा एवं समृद्ध साली बनाए हुए हैं। यह नदियां भारतवर्ष की प्रमुख नदियों को कल कल बनने में सहायता करती है। यहां से निकलने वाली अरपा नदी शिवनाथ नदी की सहायक नदी है वही सोन नदी गंगा नदी की सहायक नदी है। तान एवं बम्हनी नदी हरदेव नदी की सहायक नदी है तोतिपान एवं जोहिला नदी सोन नदी की सहायक नदी है। वर्ष 2016 में अर्पा नदी के उद्गम का अस्तित्व समाप्त करने की कोशिश के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार जिला प्रशासन गौरेला पेंड्रा मरवाही के माध्यम से इस क्षेत्र की नदियों के उद्गम को संरक्षित करने के प्रयास में जुट गया है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह शासन एवं प्रशासन का मजबूत इच्छाशक्ति के साथ उठाया गया कदम है।
राजनीतिक मानचित्र मैं अमरकंटक भले ही मध्यप्रदेश में है परंतु भौगोलिक रूप से आज भी अमरकंटक और मां नर्मदा छत्तीसगढ़ के ही हिस्से हैं। जिस तरह से माई का मड़वा एवं माई की बगिया तथा जालेश्वर महादेव, ,राजमेर गढ़ दुर्गा धारा इत्यादि तीर्थ क्षेत्र छत्तीसगढ़ में है इस भौगोलिक संरचना एवं यहां के पर्यावरण को जान समझ कर ही छत्तीसगढ़ सरकार इसे पर्यटन जिला बनाने की योजना पर काम कर रही है। माई की बगिया को मां नर्मदा का गुप्त उद्गम माना जाता है इस तरह से मां नर्मदा नदी का उद्गम स्थल भी गौरेला पेण्ड्रा मरवाही क्षेत्र ही है। इसके अलावा कई छोटे बड़े नालों का भी यह उद्गम क्षेत्र है। यह क्षेत्र देश के भूखंड का एक ऐसा हिस्सा है कि इस क्षेत्र से गंगा बेसिन, महानदी बेसिन एवं नर्मदा बेसिन सहित तीन बेसिन क्षेत्र के लिए नदियों का प्रवाह होता है। गंगा बेसिन की नदियां सोन, तिपान, जोहिला नदियां तथा महानदी बेसिन की नदियां अरपा, मलनिया, बम्हनी एवं तान तथा नर्मदा नदी की बेसिन की नदी नर्मदा का उद्गम क्षेत्र होने के कारण तीन बेसिन क्षेत्र के लिए नदियों का प्रवाहित होती है।

सोन नदी


पेण्ड्रा से मात्र 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सोनमूडा नामक स्थान से निकलकर मध्यप्रदेश, झारखण्ड़, बिहार, उत्तर प्रदेश की बहुत बड़ी आबादी के लिए जीवनदायिनी नदी है, जो कि 784 किलोमीटर बहकर बिहार में गंगा नदी में जाकर मिलती है और जिसमें एशिया का सबसे बड़ा पुल बनाया गया था।

तीपान नदी


इसी तरह से पेण्ड्रा के वार्ड क्रमांक 2 से तिपान नदी का उद्गम हुआ है।तिपान नदी का उद्गम चौरासी बांध के नीचे से हुआ है। बांध के नीचे उद्गम को संरक्षित करने के लिए कुंड नुमा संरचना बना दी गई है यहीं से तिपान नदी उत्तर दिशा में मधदपुर , वेंकट नगर, जैतहरी के अगल-बगल से होते हुए लगभग 70 किलोमीटर बहकर अनूपपुर (म0प्र0) ग्राम सीतापुर के पास में सोननदी में जाकर मिलती है। ग्राम सीतापुर अनूपपुर में सोन एवं तिपान के संगम पर प्रतिवर्ष मकर संक्रांति को 3 दिन से विशाल मेला भरता है जिसकी ख्याति दूर-दूर तक है।

संगम सोन तिपान के, संत बसे मृदु पान।
सीतापुर के निकट यहां, प्रगट भए भगवान।।

अरपा नदी


पेण्ड्रा नगर के वार्ड क्रमांक 13 से उद्गम होने वाली अरपा नदी दक्षिण दिशा की ओर बहती है और बिलासपुर शहर सहित पेण्ड्रा, गौरेला एवं कोटा तहसील क्षेत्र की बहुत बड़ी आबादी के लिए जीवनदायिनी नदी है, जो कि 147 किलोमीटर से महानदी की सहायक नदी शिवनाथ नदी में जाकर मिलती है। (अरपा नदी के बारे में विस्तृत जानकारी इसी अंक में शामिल है)

बहमनी नदी


पेण्ड्रा के घाटबहरा गांव की पहाड़ी से बम्हनी नदी का उद्गम हुआ है। यह नदी लगभग 80 किलोमीटर बहकर कोरबा जिले में हसदेव नदी में जाकर मिलती है। बम्हनी नदी पेंड्रा के पूर्वी एवं कोरबा जिले के पसान मातिन क्षेत्र को हरा भरा करती है। वन क्षेत्र से गुजरने के कारण इस नदी के पानी का बांध और सिंचाई के लिए नहीं हो पा रहा है।

तान नदी


पेण्ड्रा विकासखंड के ग्राम रामगढ़ की पहाड़ी से तान नदी का उद्गम हुआ है। यह नदी भी लगभग 80 किलोमीटर बहकर कोरबा जिले में हसदेव नदी में जाकर मिलती है। इस नदी के बहने के कारण ही पेंड्रा विकासखंड के पूर्वी हिस्से तथा कोरबा जिले के पश्चिमी हिस्से में सघन वन एवं हरियाली का आच्छादन है। तान नदी का संबंध भगवान श्री राम सीता एवं लक्ष्मण के वनवास कॉल से भी माना जाता है जिसको लेकर अनेक कथाएं ग्रामीण अंचल में प्रचलित है।


गोरेला पेण्ड्रा मरवाही इलाके की भौगोलिक विशेषता ऐसी है कि यहां से चारों दिशाओ की ओर बहने वाली नदियांे का उद्गम हुआ है। नर्मदा नदी अरब सागर के खम्भात की खाड़ी में मिलती है। सूखा पडने के कारण पानी का किल्लत झेल रहे हंै। वजह उद्गम को संरक्षित किया गया है और ना ही नदियों से बहने वाले पानी का सही प्रबंधन किया गया है। ऐसे में भविष्य में पानी के लिए समस्या हो सकती है।

नर्मदा नदी


अमरकंटक से निकलकर पश्चिम दिशा की ओर लगभग 1500 किलोमीटर बहने वाली नर्मदा नदी का गुप्त उद्गम माई की बगिया छत्तीसगढ़ अमरकंटक है। माई की बगिया से ही मां नर्मदा की परिक्रमा प्रारंभ की जाती है। विश्व में नर्मदा ही एकमात्र ऐसी नदी है जिस की परिक्रमा की जाती है।

जोहिला नदीअमरकंटक की पहाड़ी के ज्वालेश्वर नामक स्थान से निकली है जोहिला नदी के उद्गम का पौराणिक महत्व है तथा यह अमरकंटक के उत्तर में स्थित ज्वालेश्वर महादेव जो बाणलिंग कहलाता है। इसी लिंग के नीचे से रिस रिस कर पानी कुएं में जमा होता है और आगे जोहिला नदी का रूप धारण कर लेती है। यह स्थान छत्तीसगढ़ में होने के बावजूद मां नर्मदा पंचकोशी परिक्रमा तीर्थ क्षेत्र में स्थित है। जोहिला नदी सोन नदी की सहायक नदी है जो उमरिया मध्य प्रदेश के पास सोन में समा जाती है।

अमरकंटक की पहाड़ी के ज्वालेश्वर नामक स्थान से निकली है जोहिला नदी के उद्गम का पौराणिक महत्व है तथा यह अमरकंटक के उत्तर में स्थित ज्वालेश्वर महादेव जो बाणलिंग कहलाता है। इसी लिंग के नीचे से रिस रिस कर पानी कुएं में जमा होता है और आगे जोहिला नदी का रूप धारण कर लेती है। यह स्थान छत्तीसगढ़ में होने के बावजूद मां नर्मदा पंचकोशी परिक्रमा तीर्थ क्षेत्र में स्थित है। जोहिला नदी सोन नदी की सहायक नदी है जो उमरिया मध्य प्रदेश के पास सोन में समा जाती है।



छत्तीसगढ़ से निकलने वाली नदियों के उद्गम का हो संरक्षण


वर्ष 2018 में तत्कालीन छत्तीसगढ़ की रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य की प्रमुख नदियों जिनका उद्गम स्थल छत्तीसगढ़ राज्य में है उन नदियों के उद्गम स्थल के पुनर्जीवन एवं उनके जल ग्रहण क्षेत्र के विकास के संबंध में आवश्यक अध्ययन एवं कार्य योजना संबंधी कार्य हेतु राज्य स्तरीय समिति का गठन किए जाने का निर्णय लिया गया था जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य की विभिन्न नदियों का विस्तृत अध्ययन किए जाने एवं उनके संरक्षण हेतु कार्य किए जाने की योजना बनाई गई थी‌। इस समिति के अध्यक्ष श्री एस वी भागवत मुख्य अभियंता महा नदी परियोजना जल संसाधन विभाग रायपुर छत्तीसगढ़ बनाए गए थे। इस समिति ने नदियों के उद्गम के संरक्षण के लिए क्या काम किया रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। दरअसल हमारी चिंता का कारण यह है कि छत्तीसगढ़ से निकलने वाली नदियों को राजस्व रिकॉर्ड में चिन्हांकित नहीं किया गया है नदियों के लगातार दोहन से जो उद्गम सुख रहे हैं वहां विवाद की स्थिति लाने की कोशिश हो रही है। पूरे छत्तीसगढ़ में तीन दर्जन से ज्यादा नदियों का उद्गम हुआ है नालो की तो गिनती ही नहीं। इन नदी नालों पर सिंचाई विभाग ने अनेक परियोजनाएं भी संचालित किए हैं परंतु खुद जल संसाधन विभाग नदियों के उद्गम को लेकर भ्रमित है। छत्तीसगढ़ के धमतरी के सिहावा से महानदी, राजनांदगांव के अंबागढ़ से शिवनाथ नदी, कांकेर के भानूप्रतापपुर से तांदुला नदी, मनेंद्रगढ़ के रामगढ़ से हसदेव नदी, गुरुर के पेटेचुआ से खारून नदी, महासमुंद से जोक नदी, बिंद्रा नवागढ़ से पैरी नदी, मैनपाट से मांड नदी, जसपुर के पारा घाट से ईब नदी , रायगढ़ के लुड़ेग से केलो नदी, कोरबा के पठार से बोराई नदी, मलाज कुंडम से दूध नदी,, बिलासपुर के  खुड़िया पठार से कन्हार नदी, सरगुजा के मत रिंगा पहाड़ी से रिहंद नदी,दुर्ग की उच्च भूमि से कोटरी नदी , बैलाडीला से शबरी नदी,, डोंगरी डोंगरी से डंकिनी नदी, बैलाडीला से शंखिनी नदी, राजनांदगांव के पठार से बाघ नदी और कोंडागांव से नारंगी नदी निकली है। इन सबके अलावा अनेक नदी नाले जो अपार जल राशि वहन करते हैं छत्तीसगढ़ से ही निकले हैं तथा छत्तीसगढ़ की खूबसूरती बढ़ाते हैं।अकेले पेंड्रा क्षेत्र से सोन, अरपा, तान, बम्हनी, जोहिला, तिपान जैसी नदियों का उद्गम हुआ है परंतु राजस्व रिकॉर्ड में चिन्हित ना होने के कारण अब इन उद्गम ऊपर संकट मंडरा रहा हैै जिसका उदाहरण पेंड्रा से निकलने वाली अरपा है जिसे कोई विद्वान खोडरी से निकलना बताता है तो कोई विद्वान यह कहता है कि अरपा जालेश्वर महादेव से निकली है ! जबकि अरपा नदी का वास्तविक उद्गम पेंड्रा से ही है जिस पर हाई कोर्ट बिलासपुर की दखल एवं अरपा उद्गम बचाओ संघर्ष समिति पेंड्रा एवं अरपा बचाव अभियान बिलासपुर के संयुक्त प्रयास से उद्गम के संरक्षण एवं संवर्धन पर कार्य योजना तैयार हुई है। ऐसे में अब छत्तीसगढ़ सरकार से अरपा उद्गम बचाओ संघर्ष समिति पेंड्रा की मांग है कि छत्तीसगढ़ के राजस्व रिकार्डो में नदियों के उद्गम स्थल को चिन्हित किया जाकर उनके उद्गम का संरक्षण किया जाए।



नदियों का महत्व जितना भौगोलिक एवं प्राकृतिक उतना ही आध्यात्मिक


भारत नदियों का देश है। यहां की नदियां यहां की संस्कृति एवं सभ्यता का परिचायक है। भारत में नदियों को मां का दर्जा प्राप्त है यहां नदियों का जितना प्राकृतिक एवं भौगोलिक महत्व है उतना ही अधिक आध्यात्मिक। नदियों के उद्गम, संगम तथा पूरी नदी के तट को तीर्थ माना जाता है। विशेष पर्वो पर नदियों के उद्गम, तट, संगम पर स्नान, ध्यान, दान, भोग भंडारा के अलावा मेले की परंपरा है। नदियों के किनारे घाट का निर्माण, मंदिर का निर्माण, नदी के जल का पान एवं स्नान पुण्य दाई माना गया है। नदी के नाम का स्मरण करने से ही जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। यही कारण है कि हमारे सनातन धर्म में नदियों के तट पर कुंभ मेले की भी परंपरा चल रही है। नदियों ने हमेशा से मानव जाति को अपनी और आकर्षित किया है। जल ही जीवन है इसलिए नदियों को जीवनदायिनी कहा गया है। बड़े-बड़े  महानगर, नगर, कस्बे गांव नदियों के किनारे ही बसे हैं।

भारतवर्ष की प्रमुख 7 नदियां गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, महानदी, कावेरी एवं नर्मदा है। जिसमें मां नर्मदा नदी को सब नदियों में श्रेष्ठ माना गया है। मां नर्मदा ही एकमात्र  ऐसी नदी है जिसकी परिक्रमा हर साल हजारों नर नारी भक्ति भाव के साथ करते हैं। नर्मदा महात्म्य में कहा गया है कि गंगा के पान, और यमुना के स्नान से जो पुण्य फल, मोक्ष की प्राप्ति होती है वह पुण्य फल और मोक्ष मां नर्मदा के जल के दर्शन मात्र से प्राप्त होता है। कनखल में मां गंगा, कुरुक्षेत्र में मां सरस्वती का जल पवित्र माना गया है परंतु मां नर्मदा का जल का दर्शन पूरे बहाव क्षेत्र में पुण्य दाई है। कितने ही ऋषि मनीषियों ने मां नर्मदा के तट पर तपस्या कर सिद्धि प्राप्त की है। कितने ही कवियों साहित्यकारों ने इसके तट पर साहित्य साधना की है।मां नर्मदा का कंकर कंकर शंकर है अर्थात नर्मदा में पाया जाने वाला प्रत्येक पत्थर साक्षात भगवान शिव है। यही कारण है कि लोग कठिन तपस्या करते हुए कष्ट सहते हुए मां नर्मदा की परिक्रमा करते हैं।


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अक्षय नामदेव संयोजक अरपा उद्गम बचाओ संघर्ष समिति पेंड्रा छत्तीसगढ़ मोबाइल नंबर 9406 213643, 95895 26550*

Akhilesh Namdeo

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