मंत्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा अरपा महोत्सव में पेंड्रा बाईपास सड़क के निर्माण की स्वीकृति दिलाने की घोषणा से जिले में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति बढ़ा विश्वास

पेंड्रा बाईपास निर्माण होने के कारण जिले के लोगों को तकलीफों से मिलेगी निजात

अखिलेश नामदेव

गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले का बहु प्रतिक्षित पेंड्रा बाईपास सड़क निर्माण को छत्तीसगढ़ शासन के वरिष्ठ मंत्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा 110 करोड रुपए की वित्तीय स्वीकृति एक माह के भीतर दिलाए जाने की घोषणा बीते 10 फरवरी जिला स्थापना दिवस अरपा महोत्सव के दौरान किए जाने के बाद गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के लोगों में नई छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है। महज कुछ रूपो की कमी के कारण पेंड्रा के 13 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण 8 साल से लंबित है जिसके कारण पूरे गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के लोगों को आवागमन संबंधी भयंकर तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। मंत्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा एक महीने के भीतर उक्त पेंड्रा बाईपास सड़क को 110 करोड रुपए स्वीकृत कराए जाने से बाईपास सड़क निगम निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा वही क्षेत्र के लोगों को रोज हो रही दुर्घटनाओं से मुक्ति मिलेगी तथा पेंड्रा का यातायात व्यवस्थित होगा।

बाईपास सड़क नहीं होने के कारण जबलपुर, बिलासपुर, रायपुर,अंबिकापुर अमरकंटक, शहडोल सड़क मार्ग की ओर जाने वाले भारी वाहन जब पेंड्रा शहर के बीच से दुर्गा चौक बस स्टैंड होते हुए सकरे सड़क मार्ग से गुजरते हैं तो आम जनों की जान सांसत में पड़ जाती है खासकर तब जब ट्रेलर और हाईवा जैसे वाहन नो एंट्री समाप्त होने के बाद शहर से गुजरते हैं तब यातायात व्यवस्था का भगवान ही मालिक रहता है।

पूरे मरवाही विधानसभा क्षेत्र के यातायात को प्रभावित करने वाला 13 किलोमीटर लंबे पेंड्रा बाईपास सड़क नहीं बनने से पेण्ड्रा शहर के बीच से गुजरने वाली पुरानी मुख्य सड़क में यातायात का दबाव पहले से ही काफी बढ़ा हुआ था और अब जिला बनने के बाद तो यातायात को व्यवस्थित करने के लिए बाईपास अत्यंत जरूरी हो गया था। कोरबा मनेंद्रगढ़ अंबिकापुर बिलासपुर रायपुर शहडोल जबलपुर को जोड़ने वाले पेंड्रा शहर में यातायात का दबाव इतना अधिक है कि अत्यधिक है कि प्रशासन को नो एंट्री करना पड़ रहा है तथा पेंड्रा शहर के चारों ओर की सड़कों पर बड़े-बड़े भीमकाय वाहन रास्ते में खड़े रहते हैं और आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। नो एंट्री खुलने के बाद बड़े-बड़े वाहन शहर के बीचोंबीच से गुजरते हैं जिससे यातायात अनियंत्रित हो जाता है तथा लोगों के जान के लाले पड़ जाते हैं। बाईपास सड़क के अभाव में आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं तथा अनेक नागरिक बेवजह मौत का शिकार हो रहे हैं। पेंड्रा नगर की यातायात की इस समस्या एवं अव्यवस्था को समझते हुए पेण्ड्रा बाईपास सड़क निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई थी तथा इसके निर्माण के भूमि पूजन का कार्य करते हुए 54 करोड़ रुपए एकमुश्त स्वीकृत किया था। शासन द्वारा स्वीकृत 54 करोड़ की राशि लोक निर्माण विभाग संभाग पेंड्रा के खाते में जमा भी कर दी गई थी । पेंड्रा के के चारों ओर प्रस्तावित एवं स्वीकृत लगभग 13 किलोमीटर लंबी यह बाईपास सड़क के निर्माण की पूरी कार्य योजना बनने के बाद सड़क निर्माण की नई नीति के तहत अधिग्रहित जमीन की मुआवजा राशि बढ़ गई है तथा मुआवजा राशि के लिए बजट की स्वीकृति नहीं हो पाई थी इसलिए 13 किलोमीटर लंबे बाईपास सड़क निर्माण की स्वीकृति के बावजूद भी सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया जा सका है जबकि बाईपास सड़क के निर्माण शिलान्यास 24 सितंबर 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के द्वारा कर दिया गया गया था।

वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के बुरी तरह चुनाव में हार जाने के बाद पेंड्रा की इस बाईपास योजना को कांग्रेस सरकार ने भुला दिया था परन्तु अब पुनः भाजपा की नई सरकार आने के बाद वरिष्ठ मंत्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा 110 करोड रुपए की स्वीकृति इस सड़क के लिए एक महीने में दिलाने की घोषणा के बाद अब बाईपास सड़क निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा जिस जिले में खुशी की लहर है।
यहां पर उल्लेखनीय है कि 13 किलोमीटर लंबी पेण्ड्रा बाईपास सड़क पेंड्रा से सटे 7 गांवों से होकर गुजरेगी जिससे पेंड्रा का विस्तार संभव होगा वही यह गांव भी बाईपास सड़क के माध्यम से विकास की मुख्यधारा में आ सकेंगे और पेंड्रा शहर के भीतर से यातायात का दबाव कम हो जाएगा। बाईपास सड़क जिन गांव से होकर गुजरेगी उनमें दुवटिया ,कुडकई,अड़भार, अमरपुर, पेण्ड्रा, सेमरा, बंधी सेमरा,भदौरा, अमरपुर पेंड्रा है इस सड़क के निर्माण में इन उल्लेखित गांव के 288 किसान प्रभावित हो रहे हैं जिनकी 26 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित कर ली गई है जिन्हें 50 करोड़ 96 लाख रुपया मुआवजा देना है जिसमें से 13 करोड़ 82 लख रुपए स्वीकृत होकर विभाग के पास जमा है बाकी की 37 करोड़ 13 लख रुपए मिलने पर मुआवजा बताकर सड़क का काम चालू किया जाएगा। शुरु में कुछ किसानों को मुआवजा दिया जा रहा था परंतु बाद में सड़क की चौड़ाई में परिवर्तन किए जाने के कारण अधिग्रहित भूमि की मुआवजा राशि बढ़ गई है परंतु शासन द्वारा मुआवजा हेतु अतिरिक्त बजट स्वीकृत नहीं हुआ था जिसके कारण मुआवजा वितरण कार्य रोक दिया गया है परंतु अब 110 करोड रुपए की बजट की स्वीकृति मिलने के बाद बाईपास सड़क का निर्माण प्रारंभ किया जा सकेगा।


बाईपास के निर्माण प्रारंभ किए जाने से गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के लोगों को इस समस्या से मुक्ति मिलेगी तथा पेंड्रा शहर का चौतरफा विकास होगा।

Akhilesh Namdeo

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