फर्जी नामांतरण मामले में बड़ी कार्रवाई, पटवारी निलंबित, तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस,कलेक्टर डॉ संतोष कुमार देवांगन की सख्ती: जांच में लापरवाही और अनियमितता उजागर, राजस्व अमले पर गिरी गाज
आदिवासी भूमि के फर्जी फौती नामांतरण की शिकायत सही पाई गई, महेश साकत पर FIR के निर्देश

गौरेला पेंड्रा मरवाही
जिले के मरवाही तहसील अंतर्गत ग्राम मगुरदा में आदिवासी परिवार की पैतृक भूमि के कथित फर्जी फौती नामांतरण और भूमि विक्रय के प्रयास के मामले में कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर हल्का पटवारी रविन्द्र कश्यप को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने तथा तहसीलदार प्रीति शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मामले में संलिप्त पाए गए महेश साकत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश भी दिया गया है।
मामला ग्राम सेमरदर्दी (जमुनाही) निवासी सावन सिंह वाकरे, मानसिंह, रामखिलावन और दिनेश सिंह द्वारा की गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उनकी पैतृक आदिवासी भूमि का फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फौती नामांतरण कर अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया तथा शेष भूमि को बेचने का प्रयास किया जा रहा है।
अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मरवाही द्वारा की गई जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि आवेदक दिनेश सिंह द्वारा फौती नामांतरण के लिए आवेदन दिए जाने के बावजूद पटवारी ने कोई कार्रवाई नहीं की और मामले को टालता रहा। वहीं विवादित प्रकृति के मामले में नियमानुसार प्रक्रिया अपनाने के बजाय ऑनलाइन भुईयां पोर्टल में अविवादित नामांतरण दर्ज कर दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि नामांतरण प्रक्रिया के दौरान आवश्यक नोटिस और इश्तहार जारी नहीं किए गए तथा संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर भी नहीं दिया गया। इसके बावजूद अन्य व्यक्तियों के नाम भूमि अभिलेखों में दर्ज कर दिए गए। बाद में शिकायत मिलने पर अभिलेखों को फिर से पूर्ववत कर दिया गया।
जांच प्रतिवेदन में पटवारी रविन्द्र कश्यप की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए उनकी संलिप्तता की पुष्टि की गई। वहीं तहसीलदार द्वारा भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई। महेश साकत की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई, जिसके आधार पर उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर ने अपने आदेश में कहा है कि प्रकरण में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही तथा विधि-विरुद्ध कार्य किए जाने के पर्याप्त तथ्य पाए गए हैं। इसलिए दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फर्जी नामांतरण मामले में पंचायत स्तर पर भी कार्रवाई की तैयारी, सचिव और पूर्व सरपंच पर गिरी गाज
मगुरदा भूमि प्रकरण में जांच में मिली संलिप्तता, सचिव ज्योति गुप्ता और पूर्व सरपंच सुखलाल पोर्ते पर कार्रवाई के निर्देश
आदिवासी भूमि के फर्जी नामांतरण मामले में नए खुलासे, ग्राम सभा प्रस्ताव पर उठे सवाल
मरवाही तहसील के ग्राम मगुरदा में आदिवासी परिवार की पैतृक भूमि के कथित फर्जी फौती नामांतरण और विक्रय प्रयास मामले में जांच के बाद प्रशासनिक कार्रवाई का दायरा बढ़ गया है। कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर ग्राम पंचायत मगुरदा की सचिव ज्योति गुप्ता एवं पूर्व सरपंच सुखलाल पोर्ते के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मरवाही की जांच में सामने आया कि विवादित भूमि के नामांतरण के लिए ग्राम सभा द्वारा प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें तत्कालीन सरपंच एवं सचिव के हस्ताक्षर मौजूद थे। जांच में पाया गया कि बिना पर्याप्त सत्यापन और वैध उत्तराधिकारियों की जांच के ग्राम सभा प्रस्ताव तैयार किया गया। साथ ही प्रस्ताव में केवल एक खसरा नंबर का उल्लेख किया गया, जबकि विवादित भूमि कई खसरों में दर्ज थी।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, ग्राम पंचायत सचिव ज्योति गुप्ता ने पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद आवश्यक जांच-पड़ताल नहीं की और नियमों के विपरीत प्रस्ताव तैयार किया। वहीं तत्कालीन सरपंच सुखलाल पोर्ते की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। जांच में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रस्ताव पारित होने के बाद संबंधित राजस्व अधिकारियों को विधिवत सूचना और प्रमाणीकरण नहीं कराया गया।

कलेक्टर ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को भेजे पत्र में कहा है कि सचिव ज्योति गुप्ता एवं पूर्व सरपंच सुखलाल पोर्ते की संलिप्तता प्रथम दृष्टया स्पष्ट रूप से सामने आई है। इसलिए दोनों के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
गौरतलब है कि इससे पहले इसी मामले में पटवारी रविन्द्र कश्यप को निलंबित करने, तहसीलदार प्रीति शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा महेश साकत के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के बाद प्रशासन ने मामले में सख्त रुख अपनाया है।
आदिवासी भूमि से जुड़े इस संवेदनशील प्रकरण में प्रशासनिक कार्रवाई तेज होने से जिले में भू-माफियाओं और नियम विरुद्ध कार्य करने वालों के खिलाफ कड़ा संदेश गया है।

