पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में नियमों की अनदेखी! सी ई आर एल कार्यालय स्थानांतरण को लेकर उठा विवाद, संघ ने दी चेतावनी, रेल कॉरिडोर में विलंब की साजिश! गेवरा-पेंड्रा प्रोजेक्ट को कमजोर करने की कोशिश?
गेवरा-पेंड्रा रेल कॉरिडोर विवादों में घिरा, नियम विरुद्ध स्थानांतरण पर संघ और सीएसआईडीसी ने उठाए सवाल
सी ई आर एल कार्यालय के नियम विरुद्ध स्थानांतरण पर पीएमओ में शिकायत..!

छत्तीसगढ़ की बहुप्रतीक्षित गेवरा पेंड्रा रेल कॉरिडोर परियोजना जो देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है उस परियोजना पर एसईसीएल के वर्तमान प्रबंधन द्वारा नियम विरुद्ध रायपुर से स्थानांतरण कर बिलासपुर ले जाने की गोपनीय योजना पर कार्य किया जा रहा है जबकि उक्त परियोजना में तीन सहयोगी कंपनी में से एक सीएसआईडीसी द्वारा कार्यालय स्थानांतरित करने में आपत्ति दर्ज की गई है फिर भी एसईसीएल प्रबंधन द्वारा उक्त असंवैधानिक कार्य किया जा रहा..

क्या है नियम..!
सी ई आर एल प्रोजेक्ट में एसईसीएल 64% इरकॉन 26% एवं सीएसआईडीसी 10% की सहयोगी कंपनियां है क्योंकि यह परियोजना 80% लोन एवं 20% अंशदान से चल रहा है इसलिए इस परियोजना में मुनाफा पर तीनों का हक तो है ही पर घाटे में भी तीनों ही सहभागी होंगे सीएसआईडीसी की असहमति के बाद कार्यालय का स्थानांतरण पूरी तरह गैर संवैधानिक हो जाता है, क्योंकि यह कोई निजी कंपनी नहीं बल्कि केंद्र एवं राज्य सरकार के अधिनस्त कार्य करने वाली कंपनियां है इसलिए संचालन समिति के साथ साथ दोनों ही सरकारों की अनुमति भी आवश्यक है परंतु संचालन समिति के सहयोगी की असहमति से ही यह मुद्दा खत्म हो जाता है परंतु फिर भी एस ई सी एल द्वारा नियम विरुद्ध कार्य कई संदेह को जन्म देता है
कंपनी के पूर्व सी ई ओ का इस्तीफा संदेह जनक..!
सी ई आर एल के पूर्व सीईओ वल्लूरी द्वारा विगत दिनों इस्तीफा देकर नौकरी छोड़ना संदेहास्पद है क्या किसी कोल ट्रांसपोर्टर द्वारा मोटा मुनाफा देकर संचालक समिति की बैठक में कार्यालय स्थानांतरण के मुद्दे पर इरकॉन तरफ से सहमति प्रदान करवाया..??

आखिर एसईसीएल प्रबंधन असंवैधानिक रास्ता क्यों रहा..??
कहां जा रहा है कि एस ई सी एल की सबसे बड़े प्रोजेक्ट गेवरा एवं कुसमुंडा जहां प्रतिदिन हजारों ट्रक कोयला डिस्पैच किया जाता है जिसके एवज में प्रति ट्रक 1500 से 2000 रुपए की वसूली की जाती है जिसका मोटा मुनाफा मुख्यालय में बैठे अधिकारियों तक भेजा जाता है शायद यही कारण है कि अगर गेवरा कुसमुंडा पेंड्रा कॉरिडोर बन जाता है तो ट्रकों के माध्यम से कोल डिस्पैच नाम मात्र कि रह जाएगी जिससे मुनाफा खोरी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लग जाएगा इसलिए एस ई सी एल प्रबंधन द्वारा उक्त प्रोजेक्ट के कार्यालय को स्थानांतरित कर परियोजना में पूर्ण हस्तक्षेप चाहता है तथा परियोजना में विलंब भी करना चाहता है फिर चाहे भले ही वह परियोजना देश के प्रधानमंत्री का टीम प्रोजेक्ट हो..
संघ ने भी पूरे मामले में लिया संज्ञान
इस पूरी घटनाक्रम की समस्त जानकारी संघ कार्यालय तक जाने पर उन्होंने राज्य सरकार को कार्यालय के स्थानांतरण पर असहमति के साथ-साथ कहा कि देश संविधान से चलता है पूरे मामले में एसईसीएल की स्थिति संदेहास्पद अगर जबरजस्ती कार्यालय स्थानांतरित किया जाता है तो इसकी शिकायत पी एम ओ तक की जाएगी…

