नर्मदा उद्गम से निकली शिवभक्ति की अविरल धारा, अमरकंटक में 500 कांवरियों ने भरी पावन कांवड़…
गौरकापा-कवर्धा से पहुंचे श्रद्धालु, ‘हर-हर महादेव’ और ‘नर्मदे हर’ के जयघोषों से गूंजा अमरकंटक
जलेश्वर महादेव से भोरमदेव तक नर्मदा जल से होगा जलाभिषेक, सावन में आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम

अमरकंटक
सावन माह में मां नर्मदा की उद्गम स्थली अमरकंटक एक बार फिर शिवभक्ति के विराट केंद्र के रूप में दिखाई दी। श्रावण मास की नवमी तिथि पर शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले के गौरकापा से लगभग 500 कांवरियों का विशाल जत्था पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति और उत्साह के साथ अमरकंटक पहुंचा। बाबा रामगिरी धूनी से प्रारंभ हुई इस कांवर यात्रा में श्रद्धालु नृत्य-गान, भजन-कीर्तन और “हर-हर महादेव”, “बोल बम” तथा “नर्मदे हर” के गगनभेदी जयघोष करते हुए मां नर्मदा के पवित्र उद्गम तक पहुंचे। पूरे मार्ग में शिवभक्ति का ऐसा वातावरण बना कि अमरकंटक की पावन वादियां भक्तिरस से सराबोर हो उठीं।

अनुशासित पंक्तियों में आगे बढ़ते कांवरिया दल ने नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मां नर्मदा मंदिर परिसर में प्रवेश किया। यहां श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ मां नर्मदा की पूजा-अर्चना की तथा उद्गम कुंड से पवित्र जल अपनी कांवड़ों में भरा। कांवड़ पूजन के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ को नर्मदा जल अर्पित करने का संकल्प लिया। मंदिर परिसर में गूंजते भजन, शंखध्वनि और शिवनाम के जयघोषों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।


सनातन परंपरा के अनुसार मां नर्मदा के पावन जल से भगवान शिव का अभिषेक अत्यंत फलदायी और पुण्यकारी माना जाता है। इसी आस्था को लेकर कांवरिया दल अब अपने अगले पड़ाव की ओर रवाना हुआ। शनिवार, 8 अगस्त को श्रद्धालु भगवान जलेश्वर महादेव के पावन धाम पहुंचकर नर्मदा जल से जलाभिषेक, पूजन और अर्चन करेंगे। इसके पश्चात यह भक्तिमय यात्रा कबीरधाम जिले के ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर पहुंचेगी, जहां भगवान भोलेनाथ को नर्मदा जल अर्पित कर श्रद्धालु अपनी धार्मिक यात्रा पूर्ण करेंगे।
पूरी यात्रा के दौरान कांवरियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। ढोल-नगाड़ों की थाप, भक्ति गीतों की स्वर लहरियां और शिवनाम के जयघोषों के बीच श्रद्धालु पूरे मार्ग में नृत्य करते हुए आगे बढ़ते रहे। उनके चेहरों पर आस्था, अनुशासन और भक्ति का अद्भुत संगम दिखाई दे रहा था। अमरकंटक पहुंचे श्रद्धालुओं का स्वागत स्थानीय श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों ने भी श्रद्धाभाव के साथ किया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नर्मदा उद्गम से जल लेकर भगवान शिव को अर्पित करने की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मां नर्मदा और भगवान शिव के आध्यात्मिक संबंध का जीवंत प्रतीक भी है। हर वर्ष सावन मास में हजारों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर भक्ति, सेवा, अनुशासन और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का संदेश देते हैं।

सावन के पावन अवसर पर अमरकंटक में उमड़ा यह विशाल श्रद्धा-सैलाब एक बार फिर यह संदेश दे गया कि मां नर्मदा की अविरल धारा और भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था आज भी लाखों श्रद्धालुओं को एक सूत्र में बांधे हुए है। “नर्मदे हर… हर-हर महादेव… बोल बम” के जयघोषों के बीच निकला यह भक्तिमय कारवां अमरकंटक की पवित्र धरती को शिवमय बनाते हुए अपने अगले पड़ाव की ओर अग्रसर हो गया।
रिपोर्ट &फोटो :-धनंजय तिवारी अमरकंटक

